एचडीएफसी बैंक में एफपीआई की खरीदारी से होगी परख

समी मोडक | मुंबई Jun 03, 2018 09:36 PM IST

विदेशी निवेश सीमा की निगरानी की नई व्यवस्था की पहली बड़ी परख सोमवार को होगी जब एचडीएफसी बैंक के 92 अरब रुपये (1.38 अरब डॉलर) के शेयर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए खरीद की खातिर खुलेंगे। नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी व सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज की वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के मुताबिक, देश के सबसे ज्यादा मूल्यवान बैंक की 1.68 फीसदी हिस्सेदारी यानी 4.36 करोड़ शेयरों की खरीद की गुंजाइश बनाई गई है। एनएसडीएल व सीडीएसएल सूचीबद्ध फर्मों में एफपीआई की शेयरधारिता की निगरानी करते हैं।
 
एचडीएफसी बैंक में एफपीआई को नई खरीद की अनुमति फरवरी 2017 के बाद पहली बार मिली है। एफपीआई के बीच लोकप्रिय शेयरों पर विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार को वैश्विक फंडों के बीच इसके शेयरों की खरीद की होड़ होगी।  वास्तव में एफपीआई की निगरानी की नई व्यवस्था तैयार होने की वजह खुद एचडीएफसी बैंक है। साल 2017 में जब एफपीआई को इस शेयर में खरीदारी की अनुमति मिली थी तब मांग-आपूर्ति का अंतर इतना ज्यादा हो गया था कि भारतीय रिजर्व बैंक को बीच में ही परिपत्र जारी कर और खरीद पर पाबंदी लगानी पड़ी थी। एचडीएफसी बैंक में एफपीआई की शेयरधारिता 74 फीसदी के पार चली गई थी, लिहाजा नियामक की सिरदर्दी यह थी कि कैसे इस स्थिति को ठीक किया जाए। सभी सौदों को हालांकि पूरा करना पड़ा था, लेकिन इसने नियम में बदलाव के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां पैदा न होने पाए। 
 
नए नियम के तहत अगर इसी तरह सीमा का उल्लंघन होता है तो नए शेयर खरीदने वाले एफपीआई को पांच दिन के भीतर शेयर बेचना होगा। नई व्यवस्था सेबी ने आरबीआई से संपर्क के बाद अप्रैल में अधिसूचित की थी। यह नियम हालांकि 1 मई से लागू हो गया, लेकिन शुक्रवार को पहली बार एनएसडीएल व सीडीएसएल ने उन कंपनियों की कथित सूची सामने रखी जहां एफपीआई की निवेश सीमा अनुमति वाली सीमा से नीचे चली गई है। एचडीएफसी बैंक के अलावा इंडसइंड बैंक (2.1 फीसदी हिस्सेदारी खरीद की गुंजाइश) और सनटेक रियल्टी (1.25 फीसदी) उन शेयरों में शामिल हैं जहां नए ढांचे के तहत एफपीआई को खरीद की अनुमति दी जाएगी। इस सूची में वे कंपनियां शामिल हैं जहां खरीद की गुंजाइश तीन फीसदी से कम है। एफपीआई को इन शेयरों में नई खरीद की अनुमति मिली है, लेकिन शर्त यह है कि उल्लंघन होने के बाद विदेशी निवेशकों को पांच दिन के भीतर शेयर बेचने होंगे। 
 
यह विनिवेश आनुपातिक आधार पर होगा। उदाहरण के लिए एफपीआई की खरीद के लिए 4.36 करोड़ एचडीएफसी बैंक के शेयर उपलब्ध हैं, लेकिन एफपीआई ने 8.72 करोड़ शेयर खरीदे। चूंकि यह अनुमति के मुकाबले दोगुनी खरीद है, लिहाजा नई खरीदारी करने वाले सभी एफपीआई को आधे शेयर अगले पांच कारोबारी सत्र में बेचने होंगे। ऐसे में अगर किसी ने 100 शेयर खरीदे हैं तो उसे 50 शेयर बेचने होंगे। विशेषज्ञों ने कहा कि नियमों में बदलाव को देखते हुए एफपीआई को सतर्कता बरतनी होगी।
 
एक कस्टोडियन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, जैसा कि पिछली बार दिखा था, एफपीआई एचडीएफसी बैंक के शेयर भारी प्रीमियम पर खरीदने के इच्छुक थे। हालांकि इस बार उन्हें सतर्क रहना होगा। भारी मांग को देखते हुए उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि वे प्रीमियम पर खरीदेंगे और बाद में सामान्य बाजार कीमत पर बेचने को बाध्य होना पड़ेगा। ऐसा ही अप्रैल 2017 में हुआ था जब एचडीएफसी बैंक का शेयर 10 फीसदी तक चढ़ गया था, लेकिन आरबीआई की तरफ से नई खरीदारी पर पाबंदी लगाने के बाद कुल बढ़त महज 3.7 फीसदी रह गई थी।
 
इस बार आरबीआई या सेबी हालांकि बीच में खरीदारी नहीं रोकेगा, लेकिन एफपीआई को मांग का खुद ध्यान रखना होगा क्योंकि बाद में उन्हें विनिवेश करना पड़ेगा। नया परिपत्र बताता है कि अगर एफपीआई इसे बेचने में नाकाम रहते हैं तो ऐसे फंडों को खिलाफ सेबी जरूरी कदम उठाएगा।
कीवर्ड HDFC, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक