किफायती मकानों पर सस्ता होगा कर्ज

अद्वैत राव पलेपू और राघवेंद्र कामत | मुंबई Jun 06, 2018 09:46 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों व हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के लिए कर्ज की सीमा बढ़ा दी है ताकि ये वित्तीय संस्थान प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की उधारी की जरूरतें पूरी कर सके। विश्लेषकों ने कहा, बैंकों पर वित्त वर्ष के आखिर में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की उधारी (पीएसएल) की अनिवार्यता पूरी करने का  दबाव अब आरबीआई के हस्तक्षेप से घटा है। आरबीआई ने पीएसएल की पात्रता के लिए हाउसिंग लोन की सीमा 10 लाख या इससे ज्यादा आबादी वाले मेट्रो केंद्रों के लिए 28 लाख रुपये से बढ़ाकर 35 लाख रुपये कर दी है और अन्य केंद्रों, छोटे शहरों व ग्रामीण इलाकों के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये की गई है।
 
इसका मतलब यह हुआ कि शहरी क्षेत्रों में 35 लाख रुपये से कम वाले कर्ज या ग्रामीण क्षेत्रों में 25 लाख रुपये से कम वाले जिन कर्जों का वितरण बैंक करेंगे वह स्वत: ही लेनदारों के लिए पीसीएल की अनिवार्यता में आ जाएगा। यह तब तक रहेगा जब तक कि मेट्रो केंद्रों व अन्य केंद्रों में ऐसी इकाई की कुल लागत क्रमश: 45 लाख रुपये व 30 लाख रुपये के पार न चली जाए। बैंकों व एचएफसी के नजरिये से देखें तो इनकी तरफ से दिए गए शहरी इलाकों में 30 लाख रुपये से ज्यादा व गैर-मेट्रो शहरों में 25 लाख रुपये से ज्यादा के कर्ज को पीएसएल होम लोन के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जाता था।
 
रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, पीएसएल का लक्ष्य पूरा करने के लिए बैंक अन्य तरह के लेनदेन मसलन पीएसएल परिसंपत्तियों की खरीद या अन्य बैंकों या एनबीएफसी से लोनबुक की खरीद करेंगे। अब इन सीमाओं के भीतर का कोई भी कर्ज स्वत: ही लेनदार के पीएसएल खाते में चला जाएगा। एचएफसी व बैंकों का का करीब 22 फीसदी लोन पोर्टफोलियो 50 लाख रुपये से ज्यादा का होता है, वहीं 28 फीसदी कर्ज 20 से 50 लाख रुपये का होता है। ऐसे में इस पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा अब पीएसएल के लिए योग्य बन गया है। रेटिंग एजेंसी के एक विश्लेषक ने ये बातें कही।
 
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों व निचले आय समूह वालों के लिए कम लागत वाले आवास को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय बैंंक होने के नाते आरबीआई ने प्रधानमंत्री आवास योजना या अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत आïवास ऋण के हक में पीएसएल के दिशानिर्देश का झुकाव कर दिया है।   सनटेक रियल्टी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक कमल खेतान ने कहा, बैंक अब पीएसएल के तहत ज्यादा कर्ज देंगे और इस श्रेणी में उधार लेने वालों को कम दर पर कर्ज मिलेगा, जो अफोर्डेबल हाउसिंग के क्षेत्र में बढ़ोतरी लाएगा।
 
प्रधानमंत्री आवास योजना में शहरी व ग्राणीण इलाकों के लिए बजट परिव्यय 645 अरब रुपये का है और इसने आम लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। पिछले साल के मुकाबले अफोर्डेबल हाउसिंग लोन का वितरण 12 फीसदी बढ़ा है। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, मेट्रो में पहली बार घर खरीदने वालों के लिए यह काफी अहम है, जो अफोर्डेबल हाउसिंग के क्षेत्र में संपत्ति खरीदना चाहते हैं। केंद्र सरकार से सब्सिडी के लाभ के अलावा मेट्रो में घर खरीदना बहुत लोगोंं के लिए अब वास्तविकता बन जाएगा।
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