खुदरा भुगतान में कुछ ही कंपनियों का वर्चस्व

निकहत हेटावकर | मुंबई Jun 06, 2018 09:48 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक की योजना खुदरा भुगतान में और कंपनियों को प्रोत्साहित करने की है क्योंंकि अभी इस क्षेत्र में कुछ चुनिंदा कंपनियों का वर्चस्व है, जिनमें बैंक व वॉलेट शामिल हैं। आरबीआई ने कहा, खुदरा भुगतान बाजार के परिपक्व होने के साथ यह महत्वपूर्ण है कि वित्तीय स्थायित्व के लिहाज से खुदरा भुगतान की व्यवस्था में संकेंद्रण के जोखिम को कम से कम किया जाए। केंद्रीय बैंक की योजना इसमें और कंपनियों को भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना और देशव्यापी भुगतान के प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाना है ताकि इस क्षेत्र में नवोन्मेष हो व प्रतिस्पर्धा बढ़े। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर बी पी कानूनगो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, इस बारे में नीतिगत दस्तावेज 30 सितंबर तक सार्वजनिक टिप्पणी के लिए रखे जाएंगे। 
 
पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन नवीन सूर्या ने कहा, यह स्वागतयोग्य कदम है क्योंंकि आरबीआई ने अंतत: पाया है कि खुदरा भुगतान के क्षेत्र में कुछ चुनिंदा कंपनियों का वर्चस्व है। 250 अरब रुपये के मासिक खुदरा लेनदेन का 99 फीसदी बैंकों की तरफ से नियंत्रित होता है और सिर्फ एक फीसदी गैर-बैंक कंपनियां हैं, जो ज्यादातर वॉलेट हैं। उन्होंने हालांकि कहा कि इस क्षेत्र में बढ़त काफी मजबूत रही है। कानूनगो ने एक हफ्ते पहले कहा था, 2017-18 में वॉल्यूम के लिहाज से खुदरा भुगतान करीब 45 फीसदी जबकि वैल्यू के लिहाज से 30 फीसदी बढ़ा है। हालांकि इसमें बढ़त की काफी गुंजाइश है। पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया के मुताबिक, खुदरा लेनदेन का सिर्फ 12 फीसदी ही अभी डिजिटल है।  मोबिक्विक की सह-संस्थापक उपासना टाकू ने कहा, आरबीआई का फैसला भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाने के सरकार के विजन के मुताबिक है। 
कीवर्ड bank, loan, debt, RBI,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक