रिजर्व बैंक को और अधिकारों की जरूरत

भाषा | नई दिल्ली Jun 12, 2018 09:32 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल आज संसद की एक समिति के सामने पेश हुए जहां उन्हें बैंकों के वसूली में फंसे कर्ज के ऊंचे स्तर, बैंकों में धोखाधड़ी और नकदी संकट जैसे मुद्दों पर कुछ कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। पटेल ने समिति से कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अधिक कारगर निगरानी के लिए केंद्रीय बैंक को और अधिकारों की जरूरत है। सरकारी बैंकों के बारे में उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का उन पर अपर्याप्त नियंत्रण है।  बैठक में मौजूद सूत्रों ने बताया कि गवर्नर ने समिति से सरकारी बैकों पर नियंत्रण के लिए अधिक अधिकारों की मांग की। 
 
पटेल ने समिति सदस्यों को आश्वासन दिया है रिजर्व बैंक अपनी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कदम उठा रहा है।  वित्त विषयक संसद की स्थार्यी समिति की बैठक में मौजूद एक सूत्र ने बताया कि पटेल ने विश्वास व्यक्त किया है कि फंसे कर्ज यानी गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के संकट से पार पा लिया जाएगा।  कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली इस समिति के कुछ सदस्यों ने पटेल से जानना चाहा कि एटीएम मशीनों हाल में पैसा की कमी क्यों आ गई थी। कुछ सदस्यों ने पूछा कि बैंकिंग धोखाधड़ी से निपटने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाऐ गए। पटेल ने समिति से कहा कि बैंकिंग व्यवस्था को चाकचौबंद बनाए जाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। हमें विश्वास है कि हम इस संकट से निकल जाएंगे। पटेल ने समिति को सूचित किया कि दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून को लागू किए जाने के बाद एनपीए के मामले में हालात सुधरे हैं। 
 
बैठक में सदस्यों ने विभिन्न सरकारी बैंकों की खस्ता हालत, फंसे कर्ज और पंजाब नैशनल बैंक में करीब 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को लेकर चिंता व्यक्त की। पटेल ने कहा कि सरकारी बैंकों के बोर्ड मेंं केंद्रीय बैंंक की ओर से नामित कोई सदस्य शामिल नहींं होगा, जिससे कि हितो का टकराव न हो। केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक की ओर से नामित निदेशक के मसले पर वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा कर रहा है। निदेशकों की भूमिका के बारे में पटेल ने समिति को लिखित जवाब में कहा कि बैंक के बोर्ड में नामित निदेशक सहित किसी निदेशक की मुख्य भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि बैंक का प्रबंधन कुशल एवं पेशेवर तरीके से हो। 
 
भारतीय स्टेट बैंक सहित देश में कुल 21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं। वित्त वर्ष 2017-18 में सरकारी बैंकों का सामूहिक घाटा 87,300 करोड़ रुपये रहा है। पंजाब नैशनल बैंक को 12,283 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।  सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सिर्फ दो बैंक इंडियन बैंक और विजया बैंक को 2017-18 में मुनाफा हुआ है। वित्त वर्ष के दौरान इंडियन बैंक ने 1,258.99 करोड़ रुपये और विजया बैंक ने 727.02 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। दिसंबर 17 के अंत तक पूरे बैंकिंग क्षेत्र की सकल गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 8.31 लाख करोड़ रुपये थीं। 
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