मुसीबत का सबब बन रही सिक्कों की खनक

नम्रता आचार्य | कोलकाता Nov 14, 2017 10:54 PM IST

आरबीआई ने तय की थी सिक्के जमा करने की सीमा

► बैंकों के पास नहीं है सिक्के जमा करने की जगह
इनके कारण कारोबारियों को हो रही है भारी दिक्कत
एक साल में 40 फीसदी बढ़ी सिक्कों की उपलब्धता

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जुलाई में एक परिपत्र जारी कर बैंकों में सिक्कों के रूप में जमाओं की अधिकतम सीमा 1,000 रुपये तय की थी। इससे उन कारोबारियों के लिए बड़ी दिक्कत पैदा हो गई है, जिनके पास बड़ी मात्रा में सिक्के हैं। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक ज्यादा समस्या 10 रुपये के सिक्कों की वजह से है। पिछले एक साल के दौरान इन सिक्कों की अर्थ तंत्र में उपलब्धता मूल्य के हिसाब से करीब 40 फीसदी बढ़ गई है।

बैंकों के पास पहले से ही नकदी रखने के लिए जगह की भारी किल्लत है। इसलिए वे जागरूकता अभियान चलाकर कारोबारियों को सिक्के स्वीकार करने के लिए राजी कर रहे हैं। पहले बैंक किसी भी शाखा में कुल जमा का 10 फीसदी हिस्सा सिक्कों के रूप में स्वीकार कर लेते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद इनकी उपलब्धता ज्यादा हो गई है। वहीं नोटबंदी के कारण बैंकों की तिजोरियां भरी पड़ी हैं और उनके पास जगह की किल्लत है। यही वजह है कि आरबीआई ने परिपत्र जारी कर 1 रुपये या उससे अधिक मूल्य के सिक्कों के रूप में दैनिक जमा की सीमा अधिकतम 1,000 रुपये तय की थी। इस परिपत्र के मुताबिक 50 पैसे के सिक्के अधिकतम 10 रुपये तक ही जमा किए जा सकते थे।

स्टेट बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'कारोबारी समुदाय सिक्के स्वीकार करने को तैयार नहीं है। सिक्कों को जमा करना एक समस्या है क्योंकि इन्हें गिनने के लिए अधिक कर्मचारियों की जरूरत होती है और ये अधिक जगह घेरते हैं। हम अपनी शाखाओं में कारोबारियों को सिक्के स्वीकार करने के बारे में समझा रहे हैं।' आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 10 रुपये के सिक्कों का मूल्य 31 मार्च 2017 के अंत में 5,204 करोड़ रुपये था, जबकि यह 31 मार्च 2016 को महज 3,703 करोड़ रुपये था। इस तरह इसमें करीब 40.53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आरबीआई की सलाह पर बैंक 'कॉइन कैंप' आयोजित कर रहे हैं।

सरकारी क्षेत्र के एक बैंक के अधिकारी ने कहा, 'नोटबंदी के बाद करेंसी नोटों की जगह सिक्के दिए गए हैं। आरबीआई ने हमें कॉइन कैंप आयोजित करने की सलाह दी थी लेकिन इससे हमें कोई मदद नहीं मिली क्योंकि कोई  भी सिक्के स्वीकार करने को तैयार नहीं है।'  यूको बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'बैंक जमाएं बढ़ी हैं और जमा नकदी अभी आरबीआई को नहीं भेजी गई है। बैंकों में कोई जगह नहीं है और लोग भी सिक्के स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। इससे बहुत अधिक असुविधा हो रही है।' आमतौर पर ग्रे बाजार में सिक्के कम आपूर्ति के कारण 10 से 15 फीसदी ज्यादा कीमत पर बिकते हैं, लेकिन अब रुझान उलटा है। अत्यधिक आपूर्ति के कारण वहां सिक्के 10 से 15 फीसदी कम दाम पर बिक रहे हैं।

1 रुपये का सिक्का बना मुसीबत

कानपुर में भी बैंकों की लापरवाही आम ग्राहकों के लिए मुश्किलों का सबब बन गई है। यहां के बैंकों ने एक रुपये के सिक्के लेने से मना कर दिया है, जिसके बाद व्यापारी आम ग्राहकों से एक का सिक्का नहीं ले रहे हैं। दूसरी तरफ व्यापारियों के पास भी बड़े पैमाने पर सिक्के जमा हो गए हैं। बैंकों ने अब तक 10 रुपये के सिक्के पर स्थिति स्पष्टï नहीं की है और अब 1 रुपये के सिक्के स्वीकार नहीं होने से व्यापरियों की परेशानी और बढ़ गई है। व्यापारी जब बैंकों में सिक्के जमा करने गए तो वहां कर्मचारियों ने इन्हें लेने से मना कर दिया। 

दूसरी तरफ आरबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि बैंक सिक्का लेने से मना नहीं कर सकते हैं। शहरी क्षेत्र के साथ ही गांवों में भी सिक्के स्वीकार नहीं हो रहे हैं। बैंकों की लापरवाही का फायदा कटे-फ टे नोट बदलने वाले लोग उठा रहे हैं। वे एक सौ रुपये के सिक्के बदलवाने के एवज में 30-35 रुपये कमीशन की मांग कर रहे हैं।  लोगों का कहना है कि जिस तरह से बाजार में 50 पैेसे का सिक्का चलन से बाहर हो गया। ठीक उसी तरह से यही स्थिति रहने पर एक रुपये का सिक्का भी चलन से बाहर हो जाएगा। इसके पीछे बैंक कर्मचारियों की लापरवाही है।
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