मोदी सरकार के अंतिम बजट की प्रक्रिया लोकसभा में पूरी, बिना चर्चा पारित

भाषा | नई दिल्ली Mar 14, 2018 05:56 PM IST

लोकसभा ने वित्त विधेयक 2018 और 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष के लिए कुल 89.25 लाख करोड़ रुपये की व्यय योजनाओं को आज बिना चर्चा के पारित कर दिया। विपक्षी दलों की नारेबाजी के बीच सदन ने सरकार की ओर से प्रस्तुत संबंधित प्रस्तावों को 25 मिनट में पारित कर दिया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के लिए कराधान प्रस्तावों वाले विधेयक में 21 संशोधन प्रस्तुत किए थे जिन्हें ध्वनि मत से पारित किया।

साथ ही 99 मंत्रालयों तथा विभागों के विनियोग विधेयक को भी बिना चर्चा के पारित किया गया। इसके साथ मोदी सरकार के पांचवें और अंतिम बजट की प्रक्रिया लोकसभा में पूरी हो गई है। हाल के वर्षों में यह संभवत: पहली बार है कि लोकसभा ने एक भी मंत्रालय की अनुदान मांग (व्यय योजना) पर चर्चा या मतदान नहीं किया। हाल के समय में 2013-014 और 2003-04 में भी बजट बिना चर्चा के पारित किए गए।

आज सभी अनुदान मांगों को बिना चर्चा के (गिलोटीन के जरिये) पारित किया गया। 1 फरवरी को पेश वित्त वर्ष 2018-19 के इस बजट में जेटली ने सूचीबद्ध शेयरों पर दीर्घकालीन पूंजी लाभ कर फिर से लगाया है। उन्होंने बजट भाषण में कहा था कि एक लाख रुपये से अधिक के दीर्घकालीन पूंजी लाभ कर पर 10 प्रतिशत कर लगाया जाएगा। हालांकि 31 जनवरी, 2018 तक के सभी दीर्घकालीन लाभ को छूट दी गई। लोकसभा ने विनियोग विधेयक में विपक्षी दलों द्वारा लाए गए कई कटौती प्रस्तावों को अमान्य कर दिया।

बजट सत्र के दूसरे चरण में पंजाब नैशनल बैंक में सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी से कावेरी जल के विभाजन तथा आंध्र प्रदेश के लिए विशेष पैकेज समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों के संसद के कामकाज को बाधित किए जाने से सरकार ने बजट पारित कराने का फैसला किया। हालांकि सत्र 6 अप्रैल तक चलना है।

सदन की बैठक कार्यवाही के दौरान पहली बार स्थगित होने के बाद वित्त विधेयक को पारित करने के लिए लिया गया। कांग्रेस, रांकपा और तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्य इसका विरोध करते हुए बर्हिगमन कर गए। तेदेपा, टीआरएस तथा वाईएसआर कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष के आसन के पास जा कर नारे लगाते नजर आए। इससे पहले, कांग्रेस, तृणमूल, द्रमुक, राजद, सपा, वाम दल समेत अन्य ने लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन देकर इस पर आपत्ति जताई और सभी वित्तीय कार्यों को सदन में बिना किसी चर्चा पारित कराने की पहल को सरकार का अहंकार भरा और एकतरफा कदम बताया। लोकसभा ने बाद में ध्वनि मत से 2017-18 की चौथे पूरक अनुदान मांगों को भी पारित कर दिया।

चौथे बैच में 85,315 करोड़ रुपये का व्यय शामिल है जो मुख्य रूप से राज्यों को वस्‍तु एवं सेवा कर के क्रियान्वयन के कारण हुई राजस्व हानि की क्षतिपूर्ति के लिए है। विपक्षी दलों के नारेबाजी के बीच जेटली ने 2018 के वित्त विधेयक को पेश किया जिसमें कराधान प्रस्ताव शामिल है। साथ ही उन्होंने आगमी वित्त वर्ष के लिए विनियोग विधेयक भी पेश किया जिसमें विभिन्न विभागों के व्यय का ब्योरा है। विधेयक ध्वनि मत से पारित हुआ। निचले सदन में सत्तारूढ़ भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार के पास पूर्ण बहुमत है। वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक के पारित होने के साथ निचले सदन में बजट प्रक्रिया पूरी हो गई है।

तकनीकी रूप से दोनों विधेयकों को राज्यसभा भी जाना है लेकिन चूंकि ये धन विधेयक हैं, ऐसे में अगर उच्च सदन 14 दिन के भीतर नहीं लौटाता है, उसे पारित हुआ मान लिया जाएगा। राज्यसभा में विपक्षी दलों का बहुमत है।    पिछले आठ दिनों से हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बाधित है। विपक्षी दलों ने बिना चर्चा के बजट पारित किए जाने का विरोध किया।

कीवर्ड मोदी सरकार, बजट, लोकसभा, वित्त विधेयक, व्यय योजना, कराधान, गिलोटीन,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक