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बढ़ा कृषि आयात, निर्यात घटा

दिलीप कुमार झा | मुंबई Aug 09, 2017 09:07 PM IST

कृषि एवं सहायक उत्पादों में भारत का व्यापार संतुलन गिर गया है। अब निर्यात कम होकर आयात के लगभग बराबर रह गया है। करीब 4 साल पहले इनका निर्यात आयात के मुकाबले करीब 150 प्रतिशत अधिक हुआ करता था। सरकार की प्रतिकूल नीतियों के कारण आयात में जबरदस्त इजाफा हुआ है जबकि निर्यात में कमी आई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले डायरेक्टरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलीजेंस ऐंड स्टेटिस्टिक्स (डीजीसीआईएस) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में भारत से कृषि एवं सहायक उत्पादों का निर्यात 25 प्रतिशत कम होकर 24.69 अरब डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 32.95 अरब डॉलर था। इसके उलट इस दौरान इन उत्पादों का कुल आयात 13.49 अरब डॉलर से बढ़कर 23.20 डॉलर रह गया।
 
निर्यात घटने की एक बड़ी वजह सूखा भी रही है। वित्त वर्ष 2014 से लगातार दो साल देश के कई हिस्सों में सूखा पडऩे से अनेक कृषि जिंसों का उत्पादन घट गया। इनमें दलहन, खाद्य तेल और गन्ना जैसी आवश्यक जिंस भी शामिल थीं। देश की बढ़ती आबादी के साथ ही इन उत्पादों की खपत भी लगातार बढ़ रही है दूसरी तरफ सरकार ने कम उत्पादन की आशंका में चावल, गेहूं और मक्का आदि के निर्यात पर पाबंदी जारी रखी है। इन दोनों वजहों से पिछले चार सालों के दौरान कृषि और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात और आयात का संतुलन बिगड़ा है। 
 
केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं, 'घरेलू उत्पादन बढ़ाकर दलहन और खाद्य तेल का आयात कम किया जा सकता है, वहीं गैर-बासमती चावल, गेहूं और मक्का जैसे उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार को सक्रिय पहल करनी होगी। इससे वैश्विक बाजारों में भारत की कृषि व्यापार धारणा में बदलाव आएगा। जब तक सरकार निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में अधिक कृषि उत्पाद भेजने के लिए प्रोत्साहित नहीं करेगी, तब तक अधिक आयात और कम निर्यात का मौजूदा रुझान बरकरार बना रहेगा।'
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन निर्यात में सुस्ती को देखते हुए यह लक्ष्य पूरा करने में मुश्किलें आ सकती हैं। मूल्य नियंत्रण के उपायों से कृषि महंगाई पर नियंत्रण तो पाया जा सकता है, लेकिन निर्यात बढ़ाने से किसानों को घरेलू बाजार के मुकाबले अपने उत्पादों की अधिक कीमत मिलेगी। सेंटर फॉर एन्वायरनमेंट ऐंड एग्रीकल्चर (सेंटेग्रो) ने टाटा स्टै्रटेजिक मैंनेजमेंट ग्रुप के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें वर्ष 2022 तक भारत से कृषि निर्यात चौगुना किए जाने पर जोर दिया गया है।
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