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समुद्री खाद्य निर्यातक तलाश रहे अमेरिका और यूरोप का विकल्प

निर्माल्य बेहड़ा | भुवनेश्वर Aug 09, 2017 09:07 PM IST

समुद्री खाद्य आयात पर लगाम लगाने के लिए यूरोपीय संघ और अमेरिका द्वारा अपनाए गए विभिन्न प्रतिरोधात्मक उपायों के कारण भारतीय निर्यातकों को नए बाजार खोजने पड़ रहे हैं। 2016-17 में भारत ने 37,870 करोड़ रुपये के समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात किया था। समुद्री खाद्य निर्यात में अमेरिका सबसे बड़ा बाजार था और यूरोपीय संघ तीसरे स्थान पर था। जहाज द्वारा माल भेजने वाले वेस्टकोस्ट ग्रुप के निदेशक राहुल कुलकर्णी ने कहा कि हमारा विश्वास है कि छोटी और मध्यावधि में भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातक जापान, कोरिया, स्वतंत्र राष्टï्र राष्टï्रमंडल, पूर्वी यूरोप और खाड़ी देशों जैसे अन्य बाजारों का रुख करेंगे। भारत के उत्पादों के लिए इन बाजारों का और विकसित होना समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) और उद्योग के लिए अच्छा रहेगा। चीन और वियतनाम लगातार मजबूत खरीद बने हुए हैंं और इन दोनों बाजारों में भारतीय निर्यात की मात्रा में बड़े इजाफे के तगड़े संकेत मिल रहे हैं। समुद्री खाद्य व्यापारी राजेन पाढी ने कहा कि यूरोपीय संघ की पाबंदियों और अमेरिका में एंटी डंपिंग शुल्क की वजह से ध्यान पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया की ओर चला गया है। चीन, वियतनाम और थाईलैंड नए उभरते हुए बाजार हैं।

 
अमेरिका ने भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों पर और पांच सालों के लिए एंटी डंपिंग शुल्क बढ़ा दिया है। यूरोपीय संघ ने भारत से जाने वाले मत्स्य उत्पादों के लिए अपने जांच संबंधी नियमों को और कड़ा कर दिया है। इसने माल की न्यूनतम 10 प्रतिशत नमूना जांच को पिछले साल से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। सी फूड एक्सपोटर्ïर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ओडिशा क्षेत्र) के अध्यक्ष कमलेश मिश्रा ने कहा कि ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं कि यूरोपीय संघ भारतीय झींगा पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो निर्यातक निश्चित रूप से खाड़ी और दूरस्थ पूर्वी देशों में दस्तक देंगे। वह कहते हैं कि व्यापार इस तरह बाधित न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार को यूरोपीय संघ से बात करनी चाहिए।
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