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सरकारी खर्च बढऩे से इस्पात की मांग में होगा सुधार

बीएस संवाददाता | मुंबई Aug 10, 2017 09:57 PM IST

इस वित्त वर्ष में अब तक सुस्त रुझान के बाद आने वाले महीनों में भारत की इस्पात खपत में सुधार आने की संभावना बढ़ गई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र, खासकर सड़क, बिजली, पानी और गैस पाइपलाइन परियोजनाओं के खर्च में तेजी आई है। ज्वाइंट प्लांट कमेटी द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल-जुलाई 2017 के दौरान भारत की इस्पात खपत 2.62 करोड़ टन थी जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.5 फीसदी की वृद्घि है। अप्रैल-जुलाई 2017 की अवधि में कच्चे इस्पात का उत्पादन 3.18 करोड़ टन पर रहा जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 5 फीसदी अधिक है। मौजूदा रुझान को ध्यान में रखते हुए भारत में प्रमुख इस्पात उत्पादकों ने अपने उत्पादों की कीमतें अगस्त 2017 से 3000 रुपये प्रति टन तक बढ़ा दी हैं। इस्पात खपत के रुझान में यह बदलाव सरकारी खर्च के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। 
 
इस्पात दिग्गज जेएसडब्ल्यू ने बीएसई की वेबसाइट पर विश्लेषकों को मुहैया कराई गई जानकारी में कहा है, 'सार्वजनिक क्षेत्र में बढ़ते खर्च के साथ इस्पात की मांग में सुधार आ रहा है क्योंकि सड़क, विद्युत पारेषण एवं वितरण (टीऐंडडी), सौर ऊर्जा, खुदाई उपकरणों, प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग्स, पानी और गैस पाइपलाइन जैसे क्षेत्रों में कार्य गतिविधियों में तेजी आई है। हालांकि निजी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च में सुस्ती एक प्रमुख चिंता बनी हुई है।'
 
केयर रेटिंग्स के एक अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में कोल्ड रॉल्ड क्वायल्स और हॉट रॉल्ड कोइल्स की कीमतें 44,052.5 रुपये प्रति टन और 41,656.5 रुपये प्रति टन पर थीं। पूर्ववर्ती महीने (जून 2017) की तुलना में कीमतें 929-1580 रुपये प्रति टन तक बढ़ गईं। इन दोनों तरह के क्वायल्स के लिए कीमत वृद्घि पांच महीने के बाद दर्ज की गई थी। जनवरी 2017 में कीमतें मासिक आधार पर 2250-2350 रुपये प्रति टन के दायरे में बढ़ी थीं। अध्ययन में कहा गया है, 'जुलाई 2017 में कीमतों में वृद्घि की संभावना घरेलू मांग में सुधार और अंतरराष्ट्रीय इस्पात कीमतों में तेजी को ध्यान में रखकर जताई गई थी। इसलिए यदि कीमत वृद्घि अगस्त में भी बरकरार रहती है और तो इस्पात कीमतों में बढ़ोतरी तिमाही आधार पर लगातार दूसरे महीने होगी।'  
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