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सुरक्षित विकल्प रहेगा सोना

दिलीप कुमार झा | मुंबई Aug 13, 2017 09:37 PM IST

उन निवेशकों से खरीदारी तेज किए जाने के बाद सोने में अल्पावधि से मध्यावधि के दौरान तेजी बने रहने की संभावना है जो आश्वस्त प्रतिफल के लिए वैश्विक इक्विटी बाजारों से अपना पैसा निकाल कर इस धातु में लगा रहे हैं।  भू-राजनीतिक तनाव के समय में सोने में यह तेजी आई है और इसे मुद्रास्फीति के खिलाफ एक सुरक्षित दांव माना जा रहा है। डॉलर में कमजोरी के बाद पिछले सप्ताह के दौरान सोने में तेजी दर्ज की गई क्योंकि उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच पैदा हुए तनाव के बाद निवेशकों में इस धातु में खरीदारी की दिलचस्पी देखी गई है।
 
जवेरी बाजार में स्टैंडर्ड सोने का भाव शुक्रवार को 0.5 फीसदी या 140 रुपये तक बढ़कर 29,210 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसके साथ ही इस बहुमूल्य धातु ने सप्ताह के दौरान 2.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की। सोने की बढ़ती कीमतों की वजह से खरीदार पारंपरिक बाजारों से दूरी बनाए रहे क्योंकि वे नए ऑर्डर देने से पहले 'इंतजार करो और देखो' की रणनीति पर चलना पसंद कर रहे हैं।
 
भारत में सोने की कीमतें काफी हद तक वैश्विक बाजारों के रुझानों पर अमल करती हैं। वैश्विक बाजारों में सोने की कीमत लंदन में 0.7 फीसदी तक बढ़कर 1286.07 डॉलर प्रति औंस रही, जो 8 जून से इस धातु का सर्वाधिक स्तर है। गुरुवार को सोने का हाजिर भाव 1.3 फीसदी बढ़ा, जो मई के मध्य से एक दिन में सबसे बड़ी तेजी है। दिसंबर डिलिवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड वायदा 1 फीसदी तक चढ़कर 1291.8 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। संक्षेप में कहें तो निवेशकों की जोखिम सहन करने की क्षमता में बदलाव आया है और अब वे इक्विटी के बजाय सोने में खरीदारी को पसंद कर रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत में शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में पांचवें दिन भी गिरावट दर्ज की गई। 
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