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बागवानी उत्पादों में फॉरवर्ड ट्रेडिंग

दिलीप कुमार झा | मुंबई Aug 27, 2017 09:51 PM IST

सरकारी स्वामित्व वाली मिनी रत्न कंपनी एमएसटीसी लिमिटेड कुछ बागवानी उत्पादों में फॉरवर्ड कारोबार शुरू करने की योजना बना रही है। इसका मकसद कंपनी द्वारा हाल में शुरू किए गए अपने राष्ट्रव्यापी इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म- ई राष्ट्रीय किसान एग्री मंडी (ई-रकम) को कामयाब बनाना है। इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मुख्य रूप से खाद्यान्न, सब्जियों, फलों, मसलों और कृषि से संबंधित सभी जिंसों का कारोबार होता है। यह किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ता है। एमएसटीसी अपने प्लेटफॉर्म को कामयाब बनाने के लिए जल्द ही अनन्नास और आम सहित कई जिंसों में फॉरवर्ड कारोबार शुरू करेगी। 
 
केंद्रीय खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने पिछले सप्ताह कहा था कि ई-रकम पर शुरुआत में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खरीदी गई करीब 20 लाख टन दालों की नीलामी होगी। हालांकि एमएसटीसी का मानना है कि उसे फॉरवर्ड कारोबार शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरी लेना जरूरी नहीं है क्योंकि वह जल्द खराब होने वाली बागवानी जिंसों में कारोबार शुरू कर रही है, जिनका वायदा कारोबार नहीं होता है। यहां यह जिक्र करना जरूरी है कि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ने जनवरी 2016 में ऐसे फॉरवर्ड कारोबार पर रोक लगा दी थी। 
 
एमएसटीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बी बी सिंह ने कहा, 'ग्रामीण इलाकों में फूल आने के समय ही आम के बगीचों को बेच दिया जाता है। यह प्रथा लंबे समय से बिना किसी नियामकीय मंजूरी के चल रही है। अगर हम फूल आने के समय ही अनन्नास और आम उत्पादक किसानों को अपनी फसल की बिक्री से होने वाली आमदनी के बारे में बताएंगे तो वे अपने फलों की बेहतर देखभाल करेंगे। अगर किसानों को अपनी उपज की तुड़ाई से पहले ही खरीदार मिलते हैं तो यह ज्यादा बेहतर है। ' 
 
एमएसटीसी खाद्यान्न, चंदन की लकड़ी, भूखंड, सागौन और ऐसे विशिष्ट उत्पादों की राज्य और केंद्र सरकारों की तरफ से अपने पोर्टल के जरिये ई-नीलामी करती है। ई-रकम कंपनी द्वारा शुरू किया गया नया इलेक्ट्रॉनिक जिंस कारोबार प्लेटफॉर्म है। हालांकि यह उत्तर और पूर्व के किसानों को समर्पित है, जो अपनी जिंसों को देशभर के सबसे ऊंची बोली लगाने वाले खरीदारों को बेच पाएंगे और ऊंची कीमत हासिल कर पाएंगे। सिंह ने कहा, 'ई-रकम पोर्टल के लक्षित ग्राहक किसान, कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ), किसान सहकारी समितियों के संघ, नेफेड, एफसीआई, एपीडा जैसी संस्थागत एजेंसियां, मिल मालिक कारोबारी, मदर डेयरी, स्पेंसर, मेट्रो जैसी संस्थागत खरीदार आदि हैं।'
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