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लौह अयस्क की ई-नीलामी के खिलाफ याचिका खारिज

भाषा | नई दिल्‍ली Aug 28, 2017 12:46 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने भारतीय खनिज उद्योग महासंघ (फिमी) और वेदांता की कर्नाटक में लौह अयस्क की ई-नीलामी निरस्त करने की याचिका आज खारिज कर दी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि वह इस सुझाव को स्वीकार नहीं करते हैं। पीठ ने कहा, 'हम ई-नीलामी के लिए वैकल्पिक उपाय करने के वेदांता के सुझाव को खारिज करते हैं, हम फिमी की याचिका को भी खारिज करते हैं।' फिमी ने अपने सुझाव में कहा है कि ई-नीलामी किए जाने के बजाय नई प्रणाली अपनाई जानी चाहिए तथा उत्पादक और खरीदार के बीच दीर्घकालिक समझौता होना चाहिए। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने इस बारे में 28 अप्रैल, 2016 को अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था। हालांकि, इससे पहले समाज परिवर्तन समुदाय नामक गैर-सरकारी संगठन ने याचिका का विरोध किया था। संगठन का कहना है कि ई-नीलामी का मकसद राज्य सरकार को बेहतर मूल्य और रॉयल्टी उपलब्ध कराना है।

शीर्ष अदालत ने 18 अप्रैल 2013 को 3 करोड़ टन सालाना सीमा तय करते हुए बलारी, तुमाकुरू और चित्रदुर्ग जिलों में खनन की मंजूरी दे दी थी। न्यायालय ने कहा कि खनन केवल ई-नीलामी के जरिये ही होना चाहिए और यह काम केंद्रीय अधिकार संपन्न समित की निगरानी में होना चाहिए। इसके साथ ही न्यायालय ने खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचने के लिए भी कई उपायों का आदेश दिया।
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