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सोने का कोरियाई रास्ता बंद

राजेश भयानी | मुंबई Aug 27, 2017 10:27 PM IST

दक्षिण कोरिया से बिना शुल्क आयात सुविधा खत्म

मुक्त व्यापार समझौते के तहत इस सुविधा का किया जा रहा था दुरुपयोग
दक्षिण कोरिया से जुलाई से 27 टन सोने का शुल्क मुक्त आयात हुआ
शुल्क चुकाकर किया गया आयात लगभग रुक गया है और संगठित कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ

विदेश व्यापार महानिदेशक ने सोने, चांदी और इन कीमती धातुओं के सिक्कों एवं वस्तुओं के शुल्क मुक्त आयात की सुविधा खत्म करने की अधिसूचना जारी की है। इस सुविधा का जुलाई से दक्षिण कोरिया से शुल्क मुक्त आयात के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था। अब सरकार ने तत्काल प्रभाव से ऐसे आयात पर रोक लगा दी है।  डीजीएफटी ने एक अधिसूचना जारी कर दक्षिण कोरिया के साथ 2009 में किए गए मुक्त व्यापार समझौते के तहत सोने, चांदी और उनसे बनी वस्तुओं के बिना किसी शुल्क के आयात की सुविधा खत्म कर दी है।

जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स के प्रमुख विश्लेषक (कीमती धातु मांग) सुधीश नांबियथ ने कहा, 'दक्षिण कोरिया से जुलाई से करीब 27 टन सोने का बिना किसी शुल्क के आयात हुआ है। शुरुआत में कुछ आयातक आयात कर रहे थे और जुलाई में इस रास्ते से 10 टन सोने का आयात हुआ, लेकिन अगस्त के पहले तीन सप्ताह में 17 टन का आयात हुआ। आयातित वस्तुओं में सोने के आभूषण और सिक्कों एवं मेडल जैसी वस्तुएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि छोटे-बड़े 25 आयातकों ने इस सुविधा के तहत सोने का आयात किया है। 

यह अधिसूचना इस समय इसलिए जारी की गई है क्योंकि यह इस सुविधा के दुरुपयोग का मामला था और मुक्त व्यापार समझौते की भावना का उल्लंघन था। कथित रूप से 90 फीसदी आयात शीर्ष 5 आयातकों ने किया है। आयातक आयातित वस्तुओं या विभिन्न कस्टम कोड्स के तहत घोषणाओं को लगातार बदलते रहते हैं। शुल्क मुक्त आयात की वजह से भारतीय सराफा बाजार में सोना आयातित कीमत से 20 डॉलर प्रति औंस (425 रुपये प्रति 10 ग्राम) कम पर बिक रहा था। इसके नतीजतन शुल्क चुकाकर किया गया आयात लगभग रुक गया है और संगठित कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 

कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी उपाध्यक्ष (वैश्विक बैंकिंग) शेखर भंडारी ने कहा, 'सोने का संगठित आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एफटीए के तहत आयात की वजह से 750 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान का अनुमान है।' उन्होंने कहा कि इससे नियामकीय ढांचा चरमरा रहा है। भारत के दक्षिण कोरिया से सोने का आयात करने का अन्य जगहों पर भी असर पड़ा है। जीएफएमएस में वरिष्ठ विश्लेषक सैमसन ली ने कहा, 'दक्षिण कोरिया में हर साल करीब 120 टन सोने की रिफाइनिंग की क्षमता है।'

भारतीय आयात से नियमों के उल्लंघन का पता चलता है। सूत्रों के मुताबिक रिफाइंड सोना दुबई से दक्षिण कोरिया भेजा गया था, जिससे दुबई में सोना डिस्काउंट की जगह मामूली प्रीमियम पर बिकने लगा है। इतना ही नहीं दक्षिण करियाई एक्सचेंजों में सोने पर प्रीमियम मामूली था और इसमें ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह इस बात का संकेत है कि दक्षिण कोरिया में सोने का विनिर्माण नहीं हो रहा है, जो भारत द्वारा एफटीए के तहत शुल्क मुक्त आयात के लिए आवश्यक शर्त है। 

अधिकारियों के मुताबिक इस मसले की गंभीरता सरकार ने उस समय महसूस की जब यह पाया गया कि दुबई से आ रहा सोना एलबीएमए (लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन) से प्रमाणित नहीं था और संभवतया हिंसाग्रस्त अफ्रीकी देशों का सोना भारत में आया है। जब सोने पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 3 फीसदी तय किया गया तो ऐसे  आयात पर लागू 12.5 फीसदी काउंटरवेलिंग ड्यूटी को जीएसटी में समाहित कर लिया गया और इससे शुल्क-मुक्त आयात संभव हुआ। 
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