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चीनी मिलों पर 2 माह के लिए स्टॉक सीमा

राजेश भयानी | मुंबई Aug 29, 2017 10:27 PM IST

चीनी मिलों पर स्टॉक सीमा का सरकारी चाबुक

► सरकार ने वर्तमान त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतें नियंत्रित रखने के लिए उठाया कदम
मिलों के लिए स्टॉक सीमा सितंबर में 21 फीसदी व अक्टूबर में 8 फीसदी तय
केंद्र ने राज्यों से स्टॉक सीमा लागू कराने के लिए कदम उठाने को कहा
चीनी कारोबारी 500 टन से ज्यादा का नहीं कर सकेंगे स्टॉक
दक्षिण भारतीय राज्यों की मिलों ने चीनी आयात की मांगी थी मंजूरी

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों पर सितंबर और अक्टूबर महीनों के लिए स्टॉक सीमा लगाने की घोषणा की है। यह कदम त्योहारी सीजन में कीमतें नियंत्रित रखने के लिए एहतियात के तौर पर उठाया गया है। इसका पता खाद्य मंत्री के ट्विटर संदेश से चलता है, जिसमें उन्होंने लिखा है, 'देश में घरेलू उपभोग के लिए चीनी की कोई कमी नहीं है।' सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है, 'सितंबर 2017 के लिए स्टॉक सीमा चीनी सीजन 2016-17 में चीनी मिलों के पास उपलब्ध कुल चीनी की 21 फीसदी है। अक्टूबर 2017 के लिए स्टॉक सीमा 8 फीसदी है।' यह अधिसूचना सोमवार से ही लागू हो गई है। 

अधिसूचना में यह बताया गया है कि स्टॉक सीमा का आकलन कैसे किया जाए। इसमें कहा गया है, 'प्रत्येक मिल के लिए स्टॉक सीमा का आकलन इस फॉर्मूला से होगा। एक अक्टूबर 2016 को मिल के ओपनिंग स्टॉक, चीनी सीजन 2016-17 में कुल उत्पादन और आयात को जोडऩा होगा और अगर निर्यात किया है तो उसे घटाना होगा।' उद्योग के एक प्रमुख अधिकारी ने कहा, 'सरकार के इस फैसले से उन मिलों पर दबाव बढ़ेगा, जिन्होंने ज्यादा स्टॉक कर रखा है।' मिलें अधिसूचना के जरिये उनके लिए तय की गई सीमा से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं कर पाएंगी। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे मिलों पर लगाई गई भंडारण सीमा को लागू कराने के लिए कदम उठाएं। 

चीनी कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा 500 टन तय की गई है। त्योहारी सीजन पहले ही शुरू हो चुका है और आगे चीनी की मांग बढऩे के आसार हैं। इसलिए सरकार ने दक्षिण भारतीय मिलों को और आयात की मंजूरी न देकर स्टॉक सीमा का हथियार इस्तेमाल किया है। दक्षिण भारत की मिलों ने सरकार से आयात की मंजूरी मांगी थी। दक्षिण भारत में चीनी की भारी किल्लत है और कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के अनुमानों के हिसाब से अक्टूबर 2016 से सितंबर 2017 तक के चीनी सीजन में चीनी की कुल उपलब्धता 285 लाख टन रहने का अनुमान है, जिसमें 77 लाख टन पिछले सीजन का बचा हुआ स्टॉक, 203 लाख टन उत्पादन और 5 लाख टन का आयात शामिल है। बाजार के अनुमानों के मुताबिक इस समय मिलों के पास करीब 60 लाख टन चीनी का स्टॉक है। इस उद्योग के एक प्रतिनिधि ने कहा, 'सितंबर के अंत तक मिलों के पास करीब 39 लाख टन चीनी के स्टॉक का अनुमान है। अक्टूबर में दीवाली है और उस महीने मिलों को करीब 24 से 25 लाख टन चीनी की बिक्री करनी होगी, जिससे अक्टूबर के अंत में 14 लाख टन चीनी बचेगी।' उन्होंने कहा, 'स्टॉक सीमा मांग के अनुमान के मुताबिक ही है और ज्यादा स्टॉक वाली मिलों को अधिक बिक्री करनी होगी।' इस्मा ने अनुमान जताया है कि अगले सीजन में उत्पादन 251 लाख टन रहेगा। 

दक्षिण भारत की मिलों ने ज्यादा मांग और कम आपूर्ति की खाई को पाटने के लिए सरकार से चीनी आयात की मंजूरी मांगी थी, जिसके बाद सरकार ने स्टॉक सीमा का कदम उठाया गया है। आयात से अगले साल बाजार अस्थिर होने की आशंका थी क्योंकि अगले साल गन्ने और चीनी का उत्पादन काफी अधिक रहने का अनुमान है। इसलिए केंद्रीय खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने दो महीनों के लिए स्टॉक सीमा की घोषणा की ताकि आगामी त्योहारी सीजन के दौरान कीमतें स्थिर रहें। 

गन्ने की पेराई सबसे पहले पहले महाराष्ट्र में शुरू होने का अनुमान है। वहां पेराई अक्टूूबर के दूसरे सप्ताह तक शुरू हो जाएगी। इसके बाद कर्नाटक में पेराई शुरू होगी। उद्योग के अधिकारियों ने कहा, 'उत्तर प्रदेश में कुछ मिलें अक्टूबर के मध्य तक पेराई शुरू कर देंगी और दीवाली के बाद 25 अक्टूबर तक ज्यादातर मिलें चालू हो जाएंगी।' उन्होंने कहा कि नवंबर की शुरुआत तक बाजार में नए सीजन की चीनी आ जाएगी, जिससे बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति होगी। 
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