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खाद्य प्रसंस्करण में ऑस्ट्रेलिया की पैठ

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Sep 03, 2017 10:09 PM IST

भारत को पहले से बड़ी मात्रा में खाद्यान्न का निर्यात कर रहीं ग्रेनक्रॉप जैसी ऑस्ट्रेलिया की कृषि कंपनियां भारत में प्रसंस्करण इकाइयां लगाने के बारे में विचार कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया के एक राजनयिक ने बिज़नेस स्टैंडर्ड ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया भारत को खाद्यान्न प्रसंस्करण का वैश्विक केंद्र बनाना चाहता है, जिसके बाद यह कदम उठाया जा रहा है।  दक्षिण एशिया के लिए वरिष्ठ कारोबारी और निवेशक आयुक्त लियोनी मुल्दून ने कहा, 'यह उन ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के परिचालन के लिए फायदेमंद साबित होगा, जो भारत को बड़ी मात्रा में खाद्यान्न का निर्यात कर रही हैं।'
 
ऑस्ट्रेलिया कृषि उपज के लिए भारत एक बड़ा बाजार है। ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2016-17 में भारत को 92.1 करोड़ डॉलर के छोले एवं दालों और 52.53 करोड़ डॉलर के गेहूं का निर्यात किया था। पिछले चार साल के दौरान भारत द्वारा ऑस्ट्रेलिया से किए जाने वाले कृषि उत्पादों के आयात में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऑस्ट्रेलियाई कंपनियां ग्रेनकॉर्प और ओलम ऑस्ट्रेलिया भारत और आसपास के बाजारों में कारोबार बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इन कंपनियों में से एक के कार्याधिकारी ने कहा, 'हम खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की संपदा योजना का लाभ उठाने पर ध्यान दे रहे हैं, जिसमें वर्तमान सरकार द्वारा मेगा फूड पार्क, समन्वित शीतभंडारगृह, और मूल्य संवर्धन बुनियादी ढांचा शामिल है। 
 
ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2016-17 में भारत को 11.15 अरब डॉलर के माल का निर्यात किया था, जबकि केवल 2.96 अरब डॉलर के माल का आयात किया था। ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के इस व्यापार घाटे की मुख्य वजह ऑस्ट्रेलिया का 7 अरब डॉलर से अधिक का कोयला और प्राकृतिक गैस का निर्यात है।  इसके अलावा पिछले वित्त वर्ष में 35 करोड़ डॉलर के तांबे के अयस्क का आयात किया गया था। ऊंची कीमत वाले जिरकोनियम और यूरेनियम अयस्क के आयात से चालू वित्त वर्ष में आयात का बिल और बढऩे के आसार हैं। मुलदून ने कहा कि भारतीय खनन कंपनियां ऑस्ट्रेलिया से खनन उपकरण और सुरक्षा साजो-सामान खरीदने की इच्छुक हैं। इन उपकरणों में भूमिगत कामकाज के लिए डीजल चालित वाहन, धूल को रोकने वाले गैस मास्क और सुरंग खोदने के दौरान काम आने वाली स्टेबलाइजेशन मशीन आदि शामिल हैं।
 
खाद्य प्रसंस्करण, खनन, अक्षय ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और शिक्षा क्षेत्र की 70 से अधिक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर है। भारत में दूसरे ऑस्ट्रेलिया व्यापार सप्ताह का आयोजन ऑस्ट्रेलियाई व्यापार एवं निवेश आयुक्त ने किया है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के व्यापार, पर्यटन एवं निवेश सहायक मंत्री कीथ पिट, ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री के सहायक मंत्री ल्यूक हार्टसुयकर और व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल सहायक मंत्री कारेन एंड्रयू हिस्सा ले रहे हैं। इन मंत्रियों की यात्रा से कारोबारी बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत रुक गई है क्योंंकि भारत ने कृषि शुल्क घटाने की राहत देने से इनकार कर दिया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया बाजार में व्यापक पहुंच को लेकर फिक्रमंद है। एक  अधिकारी ने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया डेयरी, ताजा फल, दवा, मांस और शराब में शुल्क घटाने पर जोर दे रहा है। भारत वाहन कलपुर्जों, कपड़ों और आम सहित ताजा फलों पर शून्य शुल्क और सेवा क्षेत्र में व्यापक पहुंच चाहता है।'
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