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आयात से सस्ता होने लगा देसी प्याज

सुशील मिश्र | मुंबई Sep 04, 2017 10:05 PM IST

मिस्र से आयात

► कारोबारियों ने मिस्र से 2,500 टन प्याज का आयात किया
प्याज की पहली खेप 2,500 टन मुंबई पहुंची और दूसरी खेप 9,000 टन जल्द ही पहुंच जाएगी

महज दो सप्ताह पहले तक महंगा प्याज लोगों को रुला रहा था। प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने आयात का सहारा लिया। आयातित प्याज की आवक शुरू होते ही इसके दाम तेजी से गिरने शुरू हो गए। थोक बाजार में 25 रुपये किलो बिकने वाले प्याज के दाम गिरकर 8 से 20 रुपये तक पहुंच गए। मुंबई के खुदरा बाजार में 50 से 60 रुपये किलो बिकने वाले प्याज के दाम अब गिरकर 20-25 रुपये और दिल्ली में दाम घटकर 30 से 35 रुपये किलो रह गए हैं।

प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने प्याज के आयात को जो हरी झंडी दिखाई थी, इसके परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। निजी कारोबारियों ने मिस्र से 2,500 टन प्याज का आयात किया है, जो घरेलू बाजार में पहुंचना शुरू हो गया। इसके  बाद भी जरूरत पडऩे पर प्याज का और आयात करने की अनुमति दी जाएगी। प्याज की पहली खेप 2,500 टन मुंबई पहुंच चुकी है और प्याज की दूसरी खेप 9,000 टन जल्द ही पहुंच जाएगी।

सरकार ने निजी कारोबारियों से कहा है कि जरूरत पड़ने पर पड़ोसी देशों से प्याज का और आयात कर सकते हैं। घरेलू बाजार में विदेशी प्याज की आवक की खबर से प्याज के दाम टूटने लगे हैं। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी में इसके दाम गिरकर 18 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए। लासलगांव मंडी में सोमवार को प्याज की न्यूनतम कीमत 800 रुपये और अधिकतम कीमत 2,003 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। मंडी समिति के लोगों का कहना है कि बारिश थमने के साथ ही आपूर्ति में इजाफा होने से कीमतें गिरी हैं। 

थोक बाजार में दाम गिरने का असर खुदरा बाजार पर भी पड़ा। महज दो सप्ताह पहले मुंबई में 50 से 60 रुपये किलो बिकने वाले प्याज के दाम गिरकर 20 से 25 रुपये क्विंटल तक पहुंच गए। दिल्ली में प्याज 30-35 रुपये प्रति किलो बिक रहा। अगस्त महीने में प्याज की कीमतें अधिक होने की वजह आपूर्ति कम होना बताया जा रहा है, लेकिन राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के आंकड़े इस बात को गलत साबित करते हैं। लासलगांव में अगस्त में 3,63,130 क्विंटल प्याज की आपूर्ति हुई और महीने भर का औसत दाम 1,900 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि उसके पहले जुलाई में 3,57,590 क्विंटल और जून में 3,10,645 क्विंटल प्याज की आपूर्ति हुई। जून में प्याज का औसत दाम 551 रुपये और जुलाई की औसत कीमत 763 रुपये प्रति क्विंटल थी।

प्याज की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी की मुख्य वजह सटोरियों की तरफ इशारा करती है और यह बात जांच में लगे अधिकारी भी मान रहे हैं। उपभोक्ता मामलों के अधिकारियों का कहना है कि प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी केवल सटोरिया गतिविधियों के कारण हो रही थी। अफवाहों के सहारे दाम चढ़ाये जा रहे थे क्योंकि आधारभूत कीमतों में इतनी बढ़ोतरी इसके पक्ष में नहीं है। खरीफ की नई फसल पिछले साल से बेहतर रहने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि हमारा पहला लक्ष्य कीमतों को काबू में करना था। इसके बाद सटोरियों की पहचान और उन पर कार्रवाई करने का काम शुरू होगा।

अगस्त में महंगे प्याज ने खूब सुर्खियां बटोरी थी। इसके पीछे तर्क दिया गया कि इस साल उत्पादन कम होने से प्याज के दाम बढ़े हैं। लेकिन कृषि मंत्रालय के आंकड़ों को देखा जाए तो इस साल प्याज का उत्पादन कम नहीं बल्कि अधिक हुआ है। केंद्रीय कृषि मंत्रालयके तीसरे अग्रिम अनुमान में प्याज की उपज में करीब 8 लाख टन का इजाफा बताया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016-17 के दौरान देश में 217.18 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ, जबकि वर्ष 2015-16 के दौरान देश में 209 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था।

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