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दक्षिण की मिलों को 3 लाख टन चीनी आयात की जल्द मिलेगी मंजूरी!

राजेश भयानी | मुंबई Sep 05, 2017 09:53 PM IST

सरकार जल्द ही आयात शुल्क में 25 फीसदी छूट देकर 3 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी देगी। चीनी पर आयात शुल्क की सामान्य दर 40 फीसदी है। आयात की मंजूरी दक्षिणी राज्यों की चीनी मिलों को दिए जाने के आसार हैं। दक्षिणी राज्यों में चीनी की किल्लत है और वहां इसके दाम महाराष्ट्र की तुलना में 2 से 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम अधिक हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने सोमवार रात ट्वीट किया कि सरकार जल्द ही चीनी के आयात के बारे में कोई फैसला लेगी। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कब और कितना और कौन आयात कर सकता है। न ही शुल्क दरों को लेकर कोई खुलासा किया गया। हालांकि सूत्रों ने कहा, 'दक्षिण भारत की मिलों को अक्टूबर के मध्य तक 3 लाख टन चीनी के आयात, रिफाइनिंग और बिक्री की मंजूरी मिलेगी।' 
 
अक्टूबर के अंत से नए सीजन की चीनी बाजार में आने लगेगी और उस समय आयात से आपूर्ति के संतुलन में मदद नहीं मिलेगी। सरकार ने तीन महीने पहले मिलों और रिफाइनरी को कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दी थी। उस समय बिना किसी आयात शुल्क के 5 लाख टन चीनी आयात की मंजूरी दी गई थी। लेकिन उससे दक्षिण भारत की मांग पूरी नहीं हो पाई है। उद्योग सरकार की अधिसूचना का इंतजार कर रहा है। उद्योग का कहना है, 'आयात कोटा आधारित होगा और मिलों को पिछली बार की तरह कोटा आवंटित होगा क्योंकि दक्षिण भारत में ज्यादा रिफाइनरी नहीं हैं।'
 
इस समय महाराष्ट्र की चीनी तमिलनाडु में बिक रही है क्योंकि वहां कीमतें 5 फीसदी अधिक हैं। हालांकि उद्योग के कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि आयात कोटा इतना अधिक नहीं है कि बहुत सी छोटी मिलें कच्ची चीनी की रिफाइनिंग की खातिर कुछ दिनों के लिए अपने बॉयलर को चालू करें और फिर इसे बंद करें क्योंकि दक्षिण भारत में आम तौर पर पेराई नवंबर के अंत में या दिसंबर में शुरू होती है और उससे तीन सप्ताह पहले बॉयलर को चालू किया जाता है। 
 
इसलिए संभव है कि बहुत सी मिलें कोटा के लिए बोली न लगाएं। दूसरा मसला कच्ची चीनी की रिफाइनिंग से संबंधित है। दरअसल गन्ने के रस से चीनी बनाने के बजाय कच्ची चीनी की रिफाइनिंग में ज्यादा बरबादी होती है, जिससे छोटी मिलों के लिए कम मात्रा में रिफाइनिंग करना फायदे का सौदा नहीं है। पिछले महीने दक्षिण भारत की मिलों ने सरकार से आग्रह किया था कि उन्हें चीनी आयात की मंजूरी दी जाए। हालांकि सबसे पहले उन्हें आयात की मंजूरी देने के बजाय सरकार ने पिछले सप्ताह मिलों पर स्टॉक सीमा लगाई थी। दक्षिण भारत में अब भी कीमतें ऊंची हैं और इसलिए आयात को मंजूरी देने पर विचार किया गया। एक एजेंट ने कहा, 'जब सरकार आयात को मंजूरी देगी तो दक्षिणी बंदरगाह पर कच्ची चीनी पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगने के आसार हैं क्योंकि बांग्लादेश द्वारा आयातित चीनी को समुद्री रास्ते से भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचाया जा सकता है।'
कीवर्ड sugar, चीनी सीजन, गन्ने की खेती,

  
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