होम » Commodities
«वापस

उत्पादन में बढ़ोतरी से रबर आयात गिरा

बीएस संवाददाता | कुन्नूर Sep 14, 2017 09:08 PM IST

वर्ष 2008-09 से ही प्राकृतिक रबर आयात में बढ़ोतरी का रुझान जारी था लेकिन वर्ष 2016-17 में इसमें 7 फीसदी तक की गिरावट आ गई और आगे वर्ष 2017-18 में इसमें और गिरावट की उम्मीद है। देश में रबर उत्पादन में बढ़ोतरी की वजह आयात में कमी आई है। उपासी (यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया) के 124वें सालाना सम्मेलन में बिज़नेस स्टैंडर्ड से बातचीत करते हुए रबर बोर्ड के प्रभारी सचिव एन राजगोपाल ने बताया था कि प्राकृतिक रबर आयात में वर्ष 2008-09 से ही बढ़ोतरी हो रही है जो बढ़कर 2015-16 में 458,374 टन के स्तर पर पहुंच चुका है। वर्ष 2016-17 में पहली बार प्राकृतिक रबर के आयात में 7 फीसदी तक की गिरावट हुई और यह 426,434 टन हो गया और वर्ष 2017-18 में इसके 320,000 टन के स्तर पर आने की उम्मीद है। 
 
वर्ष 2016-17 में आयात का मूल्य 4,521 करोड़ रुपये तक था। यह एक साल पहले 4,672 करोड़ रुपये था। प्राकृतिक रबर के शुल्क मुक्त आयात की हिस्सेदारी 23 फीसदी तक थी। रबर बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक देश में प्राकृतिक रबर का उत्पादन वर्ष 2016-17 में बढ़कर 691,000 टन हो गया जो वर्ष 2015-16 में 562,000 टन था और यह वर्ष 2014-15 के 645,000 टन की तुलना में कम था। वर्ष 2016-17 में प्राकृतिक रबर की खपत 10,44,075 टन थी जो 9,94,415 टन की तुलना में अधिक है और इसमें 5 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।
 
राजगोपाल का अनुमान है कि वर्ष 2017-18 में प्राकृतिक रबर का उत्पादन 8 लाख टन रहने की उम्मीद है जबकि खपत 10,70,000 टन रहने की उम्मीद है। बोर्ड उत्पादन बढ़ाने के लिए कई पहल पर काम कर रहा है। वर्ष 2016-17 में उत्पादकता 1,437 टन की तुलना में प्रति किग्रा/हेक्टेयर 1,563 टन थी। हालांकि जिन क्षेत्रों का इस्तेमाल नहीं होता उसकी हिस्सेदारी वर्ष 2015-16 में 30 फीसदी से कम होकर 24 फीसदी हो जाता है। वर्ष 2013-14 में बिना इस्तेमाल वाले क्षेत्रों की हिस्सेदारी 8 फीसदी हो गई है। 
 
प्राकृतिक रबर के उत्पादन में गिरावट के रुझान में मई 2016 में बदलाव नजर आया और वर्ष 2016-17 में इसमें 23 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज होने लगी। राजगोपाल का कहना है कि बोर्ड बिना इस्तेमाल वाले क्षेत्रों में बढ़ोतरी करने के लिए उपाय कर रही है और इसके लिए नए राज्यों में नए क्षेत्रों को जोड़कर उत्पादन क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है। उनका कहना है कि हाल ही में टायर विनिर्माता संगठन त्रिपुरा गए और उन्होंने गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त किया है और आने वाले महीने में में आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। 
 
प्राकृतिक रबर की खपत में ऑटोमोटिव टायर क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 67.7 फीसदी तक है। राजगोपाल का कहना है कि प्राकृतिक रबर की निर्यात वैल्यू बढ़कर वर्ष 2016-17 में 220.9 करोड़ रुपये हो गई है जो वर्ष 2015-16 में 8.3 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2016-17 में आयात का मूल्य 4,521 करोड़ रुपये था जो इससे पहले साल में 4,672 करोड़ रुपये था। इस साल जनवरी से मई के दौरान प्राकृतिक रबर की दुनिया भर में आपूर्ति में कम हुई और यह करीब 6 लाख टन था और यह कमी इस साल के अंत तक बरकरार रहने की उम्मीद है। हालांकि भंडारण की स्थिति अपेक्षाकृत ज्यादा है। साथ ही संभावित प्राकृतिक रबर का उत्पादन, वास्तविक उत्पादन के मुकाबले अधिक है और भारत में यही समान स्थिति है। राजगोपाल का कहना है, 'भारत में 9 लाख टन उत्पादन की संभावना है।' 
 
भारत फिलहाल प्राकृतिक रबर का छठा सबसे बड़ा उत्पादक है और दुनिया के उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 5 फीसदी तक है। खपत के लिहाज से भारत प्राकृतिक रबर का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और दुनिया की खपत में इसकी हिस्सेदारी 8.2 फीसदी है। देश में प्राकृतिक उत्पादन का मूल्य करीब 9,300 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है और रबर विनिर्माण उद्योग का कारोबार करीब 75,000 करोड़ रुपये है जबकि रबर उत्पादों का निर्यात करीब 18,500 करोड़ रुपये है जिनमें टायर क्षेत्र का 10,000 करोड़ रुपये शामिल है। रबर उत्पादों का आयात करीब 8,640 करोड़ रुपये है।
कीवर्ड natural rubber, import, export, प्राकृतिक रबर,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक