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गिर सकते हैं पाम तेल के दाम

दिलीप कुमार झा | मुंबई Sep 15, 2017 10:12 PM IST

इंडोनेशिया और मलेशिया से कच्चे पाम तेल (सीपीओ) की भारी आपूर्ति के कारण इसकी कीमतें इस साल के अंत तक करीब 15 फीसदी गिरने के आसार हैं। इससे भारत सरकार और उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी। तीन दिवसीय ग्लोबऑयल इंडिया 2017 से इतर बोलते हुए लंदन की जिंस कारोबार करने वाली कंपनी एलएमसी इंटरनैशनल के चेयरमैन जेम्स फ्राई ने कहा, 'मलेशिया और इंडोनेशिया से भारी आपूर्ति के कारण चालू वर्ष के अंंत तक कच्चे पाम तेल के दाम गिरकर 2,400 रिंगिट (36,600 रुपये) प्रति टन पर आने के आसार हैं।' ग्लोबऑयल वनस्पति तेल, तिलहन और ओलियोकेमिकल्स आदि पर प्रीमियर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी है। 
 
बुर्सा मलेशिया पर नजदीक महीने की डिलिवरी के लिए बेंचमार्क सीपीओ अनुबंध केवल सितंबर महीने में ही 3.8 फीसदी बढ़कर 2,873 रिंगिट प्रति टन पर पहुंच गया। सीपीओ की कीमत पिछले एक महीने की तुलना में 7.8 फीसदी बढ़ी है। सीपीओ की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की मुख्य वजह मलेशिया और इंडोनेशिया में कम उत्पादन को माना जा रहा है, जहां अगस्त में रमजान/ईद के अवकाश के चलते कम कार्यदिवसों की वजह से उत्पादन घटा है। अर्जेन्टीना में सोयाबीन के भारी उत्पादन से आने वाले महीनों में मलेशिया और इंडोनेशिया में उत्पादन बढऩे के आसार हैं। सर्दियों का सीजन शुरू होने से सीपीओ का खाने में इस्तेमाल घटने के आसार हैं, जिससे कीमतें कमजोर रह सकती हैं। 
 
इससे रिफाइंड तेल, सूरजमुखी के तेल और सोयाबीन के तेल की कीमतें भी नियंत्रित रहेंगी। कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण जैव ईंधन की मांग में बढ़ोतरी के लिए कम गुंजाइश है। कीमतों में अनुमानित गिरावट से सरकार को खुदरा खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, जिसमें अगस्त के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैश्विक कीमतों में गिरावट का भारतीय बाजारों पर ऐसा ही असर पड़ेगा, बशर्ते कि रुपया वर्तमान स्तर से बहुत ज्यादा न गिरे। गोदरेज इंटरनैशनल के निदेशक दोराबा मिस्त्री ने कहा कि सीपीआई की कीमतों के लिए वर्तमान स्तरों से बढऩे की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। 
 
भारत हर साल 110 से 120 लाख टन कच्चे पाम तेल का आयात करता है। चालू तेल वर्ष यानी नवंबर 2016 से अक्टूबर 2017 के दौरान भारत का वनस्पति तेल आयात 155 लाख टन रहने के आसार हैं, जो पिछले साल 147 लाख टन रहा था। अदाणी विल्मर (फॉच्र्यून ब्रांड के खाद्य तेल की उत्पादक) के अध्यक्ष और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने अनुमान जताया कि देश में खाद्य तेल की खपत हर साल 3.5 फीसदी बढ़ेगी। रुचि सोया इंडस्ट्रीज के मुख्य परिचालन अधिकारी सतेंद्र अग्रवाल ने कहा, 'कमजोर डॉलर की वजह से दक्षिण पूर्व एशिया में स्टॉक बढऩे और सोयाबीन तेल की प्रतिस्पर्धा बढऩे से सीपीओ की कीमतें नियंत्रित रह सकती हैं। अक्टूबर में उत्पादन अपने चरम पर पहुंचने और यूरोप एवं अमेरिका में मौसमी मांग घटने से गिरावट का दबाव और बढ़ सकता है। 
 
हालांकि आयात शुल्क में बढ़ोतरी से भारतीय कीमतों पर ज्यादा असर पडऩे के आसार नहीं हैं।' इस बीच आयात शुल्क बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले से पिछले एक महीने के दौरान सोयाबीन की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे स्टॉकिस्टों को बाजारों में और ज्यादा मात्रा में बिक्री करने में मदद मिली है। इसके चलते इस साल सोयाबीन का बचा स्टॉक 15 लाख टन रहने के आसार हैं, जो पहले 25 लाख टन अनुमानित था। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल भारत में रकबा घटने के कारण सोयाबीन का उत्पादन घटकर 85 लाख टन रहेगा। 
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