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दक्षिण का कृषि-रसायन उद्योग चमकेगा

दिलीप कुमार झा | मुंबई Sep 20, 2017 09:05 PM IST

चालू वित्त वर्ष की आगामी तिमाहियों के दौरान दक्षिण की कृषि-रसायन कंपनियों के मुनाफे में उद्योग की अपेक्षा से भी अधिक संभावना नजर आ रही है। जीएसटी के असर से जून की तिमाही कमजोर रहने के उपरांत बिक्री में सुधार के बाद ऐसे आसार बने हैं। जहां एक ओर कृषि-रसायन क्षेत्र की सभी कंपनियों को 1 जुलाई से प्रभावी जीएसटी से पूर्व जून की तिमाही में स्टॉक खत्म करने की भारी समस्या का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर मॉनसूनी बारिश में विलंब ने भी हालात बद से बदतर कर दिए। परिणामस्वरूप उनके मुनाफे में कमी आई। कई सटोरियों ने अपना सामान विनिर्माताओं को लौटा दिया जिससे जून तिमाही के दौरान मुनाफे में तेज गिरावट आई। कृषि-रसायन और उर्वरक क्षेत्रों में जीएसटी शुल्क की शंका दूर कर दी जाने से जुलाई के दूसरे पखवाड़े में बिक्री ने जोर पकड़ लिया। अच्छी बारिश से भी इस धारणा को बढ़ावा मिला। इस तरह बागवानी, कपास आदि जैसी गर्मी वाली फसलों की बुआई फिर शुरू हो गई।
 
एमके ग्लोबल फाइनैंस सर्विसेज लिमिटेड के विश्लेषक सुमंत कुमार ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले दक्षिण भारत में खरीफ फसल की स्थिति अच्छी है। बारिश में देरी की वजह से दक्षिण में कपास की बुआई देरी से की गई। कुल मिलाकर, दक्षिण भारतीय कृषि-रसायन बाजार में सालाना 15-20 प्रतिशत तक की वृद्धि की उम्मीद है। खाद खंड में चंबल फर्टिलाइजर्स और दीपक फर्टिलाइजर्स पर हमारा नजरिया सकारात्मक बना हुआ है। कृषि रसायन क्षेत्र में पीआई इंडस्ट्रीज, इन्सेक्टिसाइड्स इंडिया और धानुका एग्रोटेक के दक्षिण में ध्यान केंद्रित करने के कारण हम उन्हें तरजीह देते हैं।
 
इस दौरान, अगस्त 2017 में पश्चिम और उत्तर में भारी बारिश के साथ ही दक्षिण भारत में 36 प्रतिशत कम बारिश हुई। मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली एजेंसी स्काईमेट को पांच प्रतिशत कमी के साथ मॉनसून समाप्त होने की संभावना दिख रही है, जिसका मतलब यह है कि जून और सितंबर के बीच दीर्घावधि औसत की 95 प्रतिशत बारिश रहेगी। चालू वर्ष के शेष सीजन के दौरान कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश (अति अल्प वर्षा वाले राज्यों) में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
 
धानुका एग्रोटेक लि. के प्रबंध निदेशक एमके धानुका ने कहा कि हमारे खास उत्पाद मिश्रण ने ग्राहकों को हम से कृषि का कच्च माल तैयार कराने का अवसर दिया है। इसलिए उद्योग की औसत बिक्री में पांच फीसदी बढ़ोतरी की तुलना में हमें चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अपनी बिक्री में 10 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है। बेयर क्रॉपसाइंस, धानुका एग्रीटेक, पीआई इंडस्ट्रीज आदि जैसी कंपनियों ने अपने ग्राहकों की ओर से स्टॉक खत्म करने के कारण जून तिमाही के अपने शुद्ध मुनाफे में गिरावट दिखाई है। दिलचस्प बात यह है कि बहुत-सी कृषि-रसायन कंपनियों ने अपने ग्राहकों को अपना पुराना  स्टॉक बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन देने की पेशकश की है। इस स्टॉक को उन्होंने चालू सीजन की शुरुआत में भारतीय मौसम विभाग की सामान्य मॉनसूनी बारिश की भविष्यवाणी के बाद अप्रैल-मई में एकत्रित किया था। एमके ग्लोबल ने पूर्वानुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान इन्सेक्टिसाइड्स इंडिया और धानुका एग्रोटेक का शुद्ध लाभ क्रमश: 42 प्रतिशत और 15.5 प्रतिशत बढ़ेगा। इस ब्रोकिंग फर्म ने बेयर क्रॉपसाइंस और रैलीस इंडिया के मुनाफे में भी चालू वित्त वर्ष के दौरान क्रमश: 46 प्रतिशत और 52.7 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि का अनुमान जताया है।
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