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गुजरात के कपड़ा क्षेत्र में होगा भारी निवेश

दिलीप कुमार झा | मुंबई Sep 21, 2017 09:06 PM IST

गुजरात सरकार ने अपनी कपड़ा नीति को एक साल का विस्तार देने का फैसला किया है, जिससे राज्य में इस मूल्य शृंखला के विभिन्न क्षेत्रों में 5,000 करोड़ रुपये का ताजा निवेश आने के आसार हैं।  गुजरात कपड़ा नीति वर्ष 2013 में लागू हुई थी। यह पिछले चार साल में करीब 20,000 करोड़ रुपये का निवेश ला चुकी है। साथ ही नीति योजना की बदौलत 25 लाख से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन हुआ है, जिनमें से करीब आधे रोजगार ग्रामीण महिलाओं को मिले हैं।
नीति की सफलता से उत्साहित राज्य सरकार ने इस महीने के प्रारंभ में इसकी समयावधि एक साल बढ़ाने की घोषणा की थी। इसने राज्य में पूरे कपड़ा क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस नीति से स्पिनिंग क्षेत्र में 10 लाख इकाई स्पिंडल क्षमता बढ़ी है। इसके अलावा तकनीकी कपड़ा क्षेत्र में 3 अरब डॉलर से अधिक लागत से 1,000 अधिक इकाइयों की स्थापना हुई है।
सूती कपड़ा निर्यात संवर्धन परिषद (टेक्सप्रोसिल) के कार्यकारी निदेेशक सिद्धार्थ राजगोपाल ने कहा, 'कपड़ा क्षेत्र में गुजरात अन्य प्रतिस्पर्धी राज्यों की तुलना में भारी प्रोत्साहन मुहैया करा रहा है, इसलिए तमिलनाडु, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से कपड़ा इकाइयां वहां जा रही हैं। राज्य की कपड़ा नीति की समयावधि बढ़ाए जाने से इसके लागू होने के बाद के पूंजीगत व्यय के अनुपात में ताजा निवेश बढ़ेगा।'
पिछले चार वर्षों के दौरान राज्य में औसत पूंजीगत खर्च 5,000 करोड़ रुपये रहा है, इसलिए गुजरात में अगले एक साल के दौरान इतनी ही राशि के ताजा निवेश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। कपड़ा नीति के विस्तार से अगले एक वर्ष में जिनिंग इकाइयों की संख्या 300 बढ़कर 1,400 होने और स्पिनिंग क्षमता दोगुनी यानी 40 लाख होने के आसार हैं। इसके अलावा रेशन, जूट, ऊन के अलावा तकनीकी कपड़ों के क्षेत्र में भी इकाइयां स्थापित होने की संभावना है।
गुजरात के कपड़ा क्षेत्र में निवेश लुभाने में सक्षम होने के पीछे कई कारक हैं। गुजरात देश में कपास का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इसका मतलब है कि गुजरात का भारत के कुल कपास उत्पादन में 33 फीसदी और निर्यात में 60 फीसदी योगदान है। गुजरात हर साल सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाली शंकर 6 और बीटी कपास की 1.2 करोड़ गांठों का उत्पादन करता है, जिसमें से 90 फीसदी अन्य राज्यों को भेजी जाती है।
इस नीति के तहत राज्य सरकार मूल्य संवर्धन शृंखला के लिए लगाए जाने वाले नए संयंत्र और मशीनरी के लिए 5 फीसदी ब्याज सब्सिडी देती है। इसके अलावा तकनीकी कपड़ों के लिए 6 फीसदी और कॉटन स्पिनिंग के लिए नए संयंत्र एवं मशीनरी की खातिर 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी दी जाती है।
नीति कपास से लेकर परिधान एवं मेड-अप तक पूरी मूल्य शृंखला में वर्तमान और नई इकाइयों के विस्तार पर मूल्य संवर्धित कर (वैट) में रिफंड मुहैया कराती है। इसके अलावा कॉटन स्पिनिंग के लिए नए निवेश पर बिजली शुल्क में 1 रुपये प्रति यूनिट की रियायत मिलती है।
सरकार कपड़ा एवं परिधान पार्क के लिए 50 फीसदी (अधिकतम 30 करोड़ रुपये) की वित्तीय मदद देती है। टेक्निकल पार्क के लिए अधिकतम 10 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मुहैया कराई जाती है। सेंचुरी टेक्सटाइल्स ऐंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष आर के डालमिया ने कहा, 'ताजा निवेश यानी कपड़ा मूल्य शृंखला के विस्तार से अन्य राज्यों में निवेश की ताजा आवक पर असर पड़ेगा क्योंकि गुजरात के कपड़ा नीति के विस्तार से वहां के उद्यमियों को कई फायदे मिलेंगे।'
रोचक बात यह है कि बहुत से राज्यों ने कपड़ा क्षेत्र में निवेश लाने के लिए गुजरात की कपड़ा नीति की देखादेखी की है। उद्योग के सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र ने विदर्भ में बहुत से टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की घोषणा की है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने वहां नई कपड़ा इकाइयां लगाने के लिए प्रोत्साहनों की घोषणा की है। लेकिन गुजरात कई वजह से फायदे की स्थिति में है। इसमें एक यह है कि वह बड़े उपभोक्ता बाजारों और निर्यात के लिए बंदरगाहों के नजदीक है।
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा, 'यह नीति राज्य में ताजा निवेश लाने में मददगार रही।'

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