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दलहन : दाम कम और निर्यात भी बेदम

सुशील मिश्र | मुंबई Sep 27, 2017 10:32 PM IST

समर्थन मूल्य से नीचे दलहन
वैश्विक कीमतों में बहुत ज्यादा फर्क नहीं होने से निर्यातक नहीं खरीद रहे किसानों से
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक से 200 टन दाल का निर्यात किया गया
किसानों को फसल का सही मूल्य दिलाने के लिए दी थी सरकार ने दलहन निर्यात की इजाजत
कारोबारियों के अनुमान के मुताबिक खरीफ दलहन का उत्पादन घटकर 87.1 लाख टन रहने वाला है। पिछले साल देश में खरीफ दलहन उत्पादन 94.2 लाख टन था

देश के कई हिस्सों में दलहन की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम होने के बाद सरकार ने निर्यात के दरवाजे खोल दिए। निर्यात शुरू करने का मकसद यह था किसानों को उनके उत्पाद का सही दाम मिले, लेकिन अभी तक इसमें सुधार नहीं हुआ है और कीमतें एमएसपी के नीचे चल रही हैं। अरहर की कीमत 4,000 और मूंग एवं उड़द के  दाम 5,000 रुपये के आसपास चल रहे हैं, जिसमें जल्द ही सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है। 

दलहन निर्यात की अनुमति के बाद कीमतों में और गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों में मूंग की कीमतों में पिछले एक महीने में करीब सात फीसदी की गिरावट आई। एगमार्क के अनुसार महाराष्ट्र में अगस्त में मूंग 5,265 रुपये प्रति क्विंटल बिकी जो सितंबर में 4,672 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। पिछले साल सितंबर में राज्य में मूंग की कीमत 5,251 रुपये प्रति क्विंटल थी। अरहर तुअर के दाम में भी करीब पांच फीसदी की गिरावट आई है। 

महाराष्ट्र की मंडियों में अगस्त में तुअर 4,307 रुपये प्रति क्विंटल थी जो सितंबर में घटकर 4,094 रुपये हो गई। पिछले साल सितंबर में तुअर की कीमत प्रति क्विंटल 7,059 रुपये थी। तुअर के दूसरे प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में पिछले एक महीने में तुअर में 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। मध्य प्रदेश की मंडियों में अरहर 3,475 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है जो पिछले माह 3,900 रुपये के करीब थी। 

खड़ी अरहर की कीमतों में भले गिरावट आई हो लेकिन दाल की कीमतों में कोई फर्क देखने को नहीं मिल रहा है। पिछले महीने तुअर दाल की कीमत 5,603 रुपये प्रति क्विंटल थी जो इस समय भी लगभग समान ही है। दलहन फसलों का सही मूल्य मिले और उत्पादन बढ़े, इसके लिए सरकार ने अरहर, मूंग और उड़द पर 200 रुपये बोनस भी देने का ऐलान किया। सरकार ने बोनस सहित इन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,400 से 5,550 रुपये तय किया है, लेकिन बाजार में कीमतें इससे नीचे ही चल रही है। इसे देखते हुए सरकार ने निर्यात खोलने का फैसला लिया।

अधिकारियों के अनुसार निर्यात खोले जाने के बावजूद दलहन फसलें एमएसपी के नीचे चलने के कारण अधिक निर्यात नहीं हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी तक मुश्किल से 200 टन दाल का निर्यात किया गया है। निर्यात के लिए कारोबार उत्सुक नहीं हैं क्योंकि वैश्विक कीमतों में बहुत ज्यादा फर्क नहीं होने के कारण निर्यातकों को खास फायदा नहीं होने वाला है। 

घरेलू बाजार में दाल महंगी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसकी वजह उत्पादन कम होने की बढ़ती आशंका को माना जा रहा है। बाजार के जानकारों की राय है कि खरीफ सीजन में दलहन की पैदावार में कमी आ सकती है क्योंकि बारिश और किसान आंदोलन के कारण इस बार फसल प्रभावित हुई है, जिसका असर उत्पादन में दिखेगा। कारोबारियों के अनुमान के मुताबिक खरीफ दलहन का उत्पादन घटकर 87.1 लाख टन रहने की संभावना है।

पिछले साल देश में खरीफ दलहन उत्पादन 94.2 लाख टन था जो अब तक का सबसे अधिक उत्पादन है। खरीफ सीजन में प्रमुख दलहन फसलों में तुअर और उड़द है। इस साल तुअर का उत्पादन 39.9 लाख टन और उड़द का उत्पादन 25.3 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि पिछले साल खरीफ सीजन में तुअर का उत्पादन 47.8 लाख टन और उड़द का उत्पादन 21.7 लाख टन था। 

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