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दक्षिण भारतीय मिलों को फिर से कोटा आवंटित

भाषा | नई दिल्ली Sep 29, 2017 08:50 PM IST

खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार ने दर्जनों दक्षिण भारतीय मिलों द्वारा लौटाए गए 92,000 टन कच्ची चीनी के आयात कोटे का फिर से आवंटन किया है तथा आयात की खेप अक्टूबर मध्य के बाद से आने की उम्मीद है। सरकार ने 7 सितंबर को दक्षिण भारत में आपूर्ति बढ़ाने के लिए रियायती 25 प्रतिशत आयात शुल्क पर तीन लाख टन कच्ची चीनी का आयात करने की अनुमति प्रदान की थी। यह आयात कोटा केवल दक्षिण भारतीय मिलों के लिए आवंटित किया गया था। सामान्य तौर पर चीनी पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत है। 
 
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि करीब 41 चीनी मिलों ने आयात में रुचि दिखाई। हमने नियम के मुताबिक तीन लाख टन कच्ची चीनी के आयात कोटा को आवंटित किया। लेकिन 11-12 मिलों ने यह कहते हुए 92,000 टन कच्ची चीनी को लौटा दिया कि यह उनके लिए लाभप्रद नहीं है। हमने उस कोटे को फिर से आवंटित किया है। उन्होंने कहा कि चीनी की वैश्विक कीमतें अभी भी आयात के लिहाज से आरामदेह हैं और कुछ चीनी मिलों ने ऑर्डर दे दिया है। आयात की खेप मध्य अक्टूबर से आना शुरू होंगी। उन्होंने कहा कि उन चीनी मिलों-रिफाइनिंग कंपनियों को आयात की अनुमति दी गई है जिनके पास कच्ची चीनी को रिफाइंड करने की खुद की क्षमता मौजूद हो।
 
उन्होंने कहा कि महत्त्वपूर्ण त्योहारों के दौरान तथा दीवाली के बाद शुरू होने वाले नए पेराई सत्र तक के लिए दक्षिण भारत में चीनी की मांग को ध्यान में रखते हुए आयात करने की अनुमति दी गई है। आयात की खेप दक्षिण में तुतीकोरिन, काराईकाल, चेन्नई, मंगलूरु, कोकीनाडा, गंगावरम और विशाखापत्तनम के बंदरगाहों के जरिए करने की अनुमति दी गई है। चालू माह में खत्म होने वाले वर्ष 2016-17 के चीनी सत्र में चीनी उत्पादन के घटकर 2.03 करोड़ टन रह जाने का अनुमान है जो उत्पादन पिछले वर्ष में 2.5 करोड़ टन का हुआ था। दक्षिणी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु और कर्नाटक में यह कमी कुछ हिस्सों में सूखा पडऩे की वजह से अधिक है। कुछ स्थानों पर चीनी की खुदरा कीमत 42 से 43 रुपये किलो है और सरकार इसके कीमत के उतार चढ़ाव पर करीबी नजर रख रही है।
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