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बफर स्टॉक से दालें बेचेगा केंद्र

बीएस संवाददाता/एजेंसियां | नई दिल्ली Oct 04, 2017 10:09 PM IST

सरकार ने अपने लगभग 18 लाख टन के बफर स्टॉक से 5.5 लाख टन दालों की बिक्री कम दरों पर करने का निर्णय लिया है। यह बिक्री पांच राज्यों और मिड-डे मील कार्यक्रम जैसी केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं के लिए की जाएगी। इसके अलावा केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत शामिल लाभार्थियों की सूची अद्यतन करने के लिए एक प्रणाली तैयार करने के वास्ते भी उनके साथ काम करने को इच्छुक है।
 
इस सूची के स्वत: अद्यतन होने से केंद्र को पीडीएस सूची से लाभार्थियों के नाम हटने या जुडऩे से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी। अक्सर पते में बदलाव, शादी या मृत्यु की वजह से सूची में बदलाव होता रहता है। एनएफएस के ताजा राष्ट्रव्यापी सोशल ऑडिट के दौरान भी इस तरह की चिंता सामने आई है। खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि दालों पर सरकार का 18 लाख टन का बफर स्टॉक बरकरार है और कुछ मात्रा राज्यों और उनकी कल्याणकारी योजनाओं के लिए दिए जाने का निर्णय लिया गया है।
 
पहली बार, सरकार ने पिछले साल यह सुनिश्चित करने के लिए दालों का बफर स्टॉक बनाने का निर्णय लिया था कि किसानों को बेहतर कीमतें मिल सकें और साथ ही कीमत वृद्घि के समय में स्थानीय आपूर्ति बढ़ाने के लिए इस स्टॉक का इस्तेमाल किया जा सके। स्थानीय खरीद और आयात के जरिये लगभग 20 लाख टन का बफर स्टॉक बनाया गया था। 
उन्होंने कहा कि लगभग 3.5 लाख टन दालें कम कीमत पर पांच राज्यों - कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को दी जाएंगी। 
 
उन्होंने कहा कि वहीं दो लाख टन दालें मिड-डे मील कार्यक्रम जैसी केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं के तहत होने वाली खपत के लिए मुहैया कराई जाएंगी और इसके लिए जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी। मंत्री ने यह भी बताया कि समान मात्रा में दालें नीलामी के जरिये खुले बाजार में पहले से ही बेची जा रही हैं। अभी तक करीब दो लाख टन दाल की बिक्री नीलामी के जरिए की जा चुकी है लेकिन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार उसका लक्ष्य चार लाख टन दलहन का निपटान करने का है। पासवान ने कहा कि नीलामी के रास्ते के अलावा दलहन की पर्याप्त मात्रा को तत्काल बेच दिया जाएगा और इसके कारण बफर स्टॉक का बोझ कुछ कम होगा। उपभोक्ता मामलों के सचिव अविनाश श्रीवास्तव ने बताया, 'अगर कम से कम 10 लाख टन दलहन हमारे स्टॉक से निकल जाता है तो हम बाकी 10 लाख टन का आसानी से प्रबंधन कर सकेंगे। हम पुराने भंडार को पहले निपटाएंगे।' 
 
उल्लेखानीय है कि पिछले वर्ष सरकार ने स्थानीय आपूर्ति बढ़ाने और फुटकर कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए शुरू में बाजार दर पर दलहनों की खरीद की लेकिन जब भारी मात्रा में फसल हुई और कीमतें टूट गई तो सरकार ने समर्थन मूल्य  पर इसे खरीदना शुरू किया। मौजूदा समय में ज्यादातर दाल की  कीमतें खुदरा बाजार में अभी भी कम हैं। फसल वर्ष 2016-17 (जुलाई से जून) में रिकॉर्ड 2.295 करोड़ टन दलहन का उत्पादन हुआ। इसकी वजह यह थी कि बारिश अच्छी हुई थी और साथ ही समर्थन मूल्य भी अच्छा था। 
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