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चीनी उद्योग ने बढ़ाकर पेश किए आंकड़े

दिलीप कुमार झा | मुंबई Oct 05, 2017 10:01 PM IST

देश की चीनी मिलों ने अक्टूबर में जितनी चीनी के उत्पादन का आश्वासन दिया था, उसका 40 फीसदी उत्पादन ही होने के आसार हैं। मिलों के आश्वासन और विश्लेषकों के अनुमानों के आधार पर इस उद्योग की शीर्ष संस्था ने अगस्त में केंद्रीय खाद्य मंत्रालय को यह लिखित आश्वासन दिया था कि अक्टूबर में 8 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलों ने इस बार तीन से चार सप्ताह पहले पेराई शुरू करने की योजना बनाई थी। इस तरह देश के चार सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों- उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र की प्रमुख मिलों ने कहा था कि वे अक्टूबर के अंत या नवंबर के प्रारंभ में गन्ने की पेराई शुरू करने के बजाय अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही पेराई शुरू कर देंगी। 
 
चीनी उत्पादन कारखानों में सालाना मरम्मत के काम में देरी के कारण नए सीजन की पेराई की शुरुआत दो सप्ताह आगे खिसक गई है। मिलों को जल्द चालू करने का मकसद गन्ने की अगेती किस्मों की पेराई करना था। आम तौर अगेती किस्मों के गन्ने की बिक्री गुड़ एवं खांडसारी उद्योग को की जाती है क्योंकि इस समय तक चीनी मिलें चालू नहीं होती हैं। उद्योग का अनुमान है कि गुड़ एवं खांडसारी इकाइयां देश में उत्पादित होने वाले कुल गन्ने के 15 फीसदी हिस्से की खरीदारी करती हैं। 
 
हर साल होने वाली कारखानों की मरम्मत के काम में देरी के कारण नया पेराई सीजन दो सप्ताह देरी से शुरू हो पाएगा। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि अक्टूबर में उत्पादन 3 से 3.5 लाख टन रहेगा, जो सरकार को दिए गए 8 लाख टन के आश्वासन से बहुत कम है। अब ज्यादातर मिलों ने अक्टूबर के चौथे सप्ताह में पेराई शुरू करने की योजना बनाई है, जबकि उन्होंने अक्टूबर के पहले सप्ताह में पेराई शुरू की योजना बनाई थी। महाराष्ट्र (दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक) में सरकार ने 1 नवंबर से पेराई शुरू करने की घोषणा की है।' इस्मा के अक्टूबर में 8 लाख टन की नए सीजन की आपूर्ति के आश्वासन और 40 लाख टन के बचे हुए स्टॉक के आधार पर केंद्र सरकार ने सूखा प्रभावित पश्चिमी राज्यों को महज 5 लाख टन और दक्षिणी राज्यों को 3 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दी। 
 
अब उत्तर प्रदेश की ज्यादातर मिलें अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में पेराई शुरू करने की योजना बना रही हैं। वे मजदूरों की किल्लत होने के आसार के कारण दीवाली से पहले पेराई शुरू नहीं करेंगी। उत्तर प्रदेश सरकार का अनुमान है कि गन्ने की अच्छी उपलब्धता की बदौलत इस सीजन में चीनी का उत्पादन 10 फीसदी बढ़कर 100 लाख टन रहेगा, जबकि पूरे देश में चीनी वर्ष 2017-18 के दौरान 251 लाख टन चीनी उत्पादित होने का अनुमान है। 
 
द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के निदेशक बी जे माहेश्वरी ने कहा, 'हमने नए सीजन में गन्ने की पेराई दीवाली के कुछ दिन बाद शुरू करने की योजन बनाई है। तब तक मजदूर दीवाली की छुट्टियों के बाद लौट आएंगे। इस देरी के बावजूद इस बार बीते वर्षों के मुकाबले 7 से 10 दिन पहले पेराई शुरू होगी।'पिछले मॉनसून के दौरान कम बारिश के कारण चीनी का उत्पादन 2016-17 में 202.9 लाख टन रहा था, जबकि देश में खपत 235 लाख टन होने का अनुमान है। 
 
सहकारी चीनी फैक्टरियों के महाराष्ट्र राज्य संघ के प्रबंध निदेशक संजीव बाबर ने कहा, 'महाराष्ट्र में चीनी मिलें नया सीजन 1 नवंबर से शुरू करने की योजना बना रही थीं। इस देरी का मकसद यह था कि सितंबर में हुई भारी बारिश से गन्ने की कटाई में कोई दिक्कत न आए। गन्ना अक्टूबर और नवंबर में पकता है, इसलिए हम नहीं चाहते कि किसान बिना पके ही गन्ने की कटाई करें और हमें गन्ने से कम चीनी मिले।' इस साल महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 55 फीसदी बढ़कर 74 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 42 लाख टन रहा था। 
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