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एमसीएक्स का सोने में ऑप्शन जल्द

राजेश भयानी | मुंबई Oct 10, 2017 10:05 PM IST

जिंसों में ऑप्शन कारोबार संभवतया अगले सप्ताह धनतेरस तक हकीकत बन सकता है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने में ऑप्शन कारोबार शुरू होने के आसार हैं। एमसीएक्स जिंसों में ऑप्शन शुरू करने वाला देश का पहला एक्सचेंज है। इसे सोना (1 किलोग्राम) वायदा पर आधारित गोल्ड ऑप्शन सौदे शुरू करने के लिए सेबी की मंजूरी मिल गई है। 
 
सरकार ने सबसे पहले फरवरी 2015 में जिंसों में ऑप्शन को मंजूरी दी थी। दो साल पहले जिंस नियामक के सेबी में विलय से ऑप्शन कारोबार को अमलीजामा पहचाने का रास्ता साफ हो गया था। जिंसों में ऑप्शन को मंजूरी मिले करीब दो साल हो गए हैं और अब जल्द ही यह हकीकत बनने जा रहा है। एक अन्य एक्सचेंज एनसीडीईएक्स को सेबी से ग्वार में ऑप्शन कारोबार शुरू करने की मंजूरी मिली है। ग्वार एनसीडीईएक्स पर सबसे ज्यादा कारोबार वाली जिंसों में से एक है। सूत्रों के मुताबिक एनसीडीईएक्स जोखिम प्रबंधन प्रणाली और अन्य मसलों का परीक्षण कर रहा है। 
 
एमसीएक्स ने एक परिपत्र में कहा कि तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी, लेकिन कारोबारियों का अनुमान है कि एक्सचेंज दीवाली से पहले कारोबार शुरू कर देगा। एमसीएक्स 1 किलोग्राम सोना वायदा पर आधारित ऑप्शन को मंजूरी दे रहा है। इसका मतलब है कि गोल्ड मिनी जैसे अन्य वैरिएंट में ऑप्शन कारोबार की मंजूरी नहीं होगी। दो प्रकार यानी कॉल एवं पुट ऑप्शन उपलब्ध होंगे। कॉल ऑप्शन को खरीदने का मतलब है कि खरीदार को कीमतों में बढ़ोतरी के आसार नजर आ रहे हैं और पुट ऑप्शन खरीदने का मतलब है कि खरीदार को कीमतों में गिरावट के आसार दिखाई दे रहे हैं। दोनों ही मामलों में कीमत हलचल के अनुमान सही साबित होते हैं तो ऑप्शन का प्रीमियम और खरीदार का लाभ बढ़ेगा। 
 
सेलिंग ऑप्शन में इसके ठीक विपरीत होता है। भारत में बाजार नियामक सेबी ने यूरोपीय शैली के ऑप्शन को मंजूरी दी है, जिसका मतलब है कि परिपक्वता की एक निश्चित अवधि होगी और जिंसों में ऑप्शन उन वायदा अनुबंधों में शुरू किए जाएंगे, जो कारोबार के लिए शुरू किए गए हैं। हालांकि ऑप्शन के निपटान का तीरका इक्विटी से अलग होगा। इक्विटी में ऑप्शन का निपटान नकद में होता है, लेकिन जिंसों में भौतिक डिलिवरी में भी निपटान की मंजूरी होने के कारण ऑप्शन में यह विकल्प भी होगा। इसलिए अगर निश्चित समयावधि में स्कवेयर ऑफ न करने पर सभी ऑप्शन परिवक्वता पर ïवायदा अनुबंध बन जाएंगे। 
 
इसके वायदा अनुबंध बनने के बाद इस पर वायदा के सभी नियम लागू होंगे और तब डिलिवरी भी दी जा सकेगी। एमसीएक्स के परिपत्र में विस्तार से बताया गया है कि ऑप्शन का कारोबार और निपटान कैसे होगा। जब कोई व्यक्ति ऑप्शन खरीदता है तो वह बोला जा रहा प्रीमियम चुकाता है और अगर रुझान पलट जाता है तो उसे अधिक से अधिक चुकाए गए प्रीमियम का ही नुकसान होता है, जबकि ऑप्शन का विक्रेता बाजार आधारित प्रीमियम नुकसान का असीमित जोखिम उठाता है। आयातक बैंक एवं एजेंसियां और कारोबारी एवं सराफ अपने कीमत जोखिमों की हेजिंग के लिए ऑप्शन खरीदते हैं। इसमें अहम यह होगा कि कौन ऑप्शन बेचता है। 
 
इन ऑप्शन के विक्रेता बैंक या ऐसे ऋणदाता हो सकते हैं, जो बदला या मुनाफा कमाने के लिए धन का निवेश करते हैं, जो आमतौर पर सामान्य ब्याज दरों से अधिक होती हैं। आम तौर पर ऐसे ऋणदाता ऑप्शन की बिक्री करते हैं क्योंकि ऑप्शन के खरीदार जोखिम की हेजिंग करते हैं और अगर उनका दांव गलत जाता है तो वे अपने प्रीमियम को भूलने के लिए तैयार होते हैं। इसकी वजह यह है कि हेज एक तरीके का बीमा प्रीमियम है। हालांकि ऑप्शन के विक्रेता सबसे ज्यादा जोखिम लेते हैं, इसलिए वे ऑप्शन कारोबार में सबसे ज्यादा पैसा बनाते हैं।  
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