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भारत में चाय की कीमतें घटीं

टी ई नरसिम्हन | चेन्नई Oct 10, 2017 10:06 PM IST

चालू वर्ष के सात महीनों के दौरान जहां प्रमुख चाय उत्पादक देशों ने कीमतों में तेजी दर्ज की है, वहीं भारत में इस अवधि में लगभग 3.5 फीसदी की गिरावट आई है। जहां श्रीलंकाई चाय 2017 (कैलेंडर वर्ष) के 7 महीनों के दौरान 4.03 डॉलर प्रति किलोग्राम (पिछली अवधि के 2.95 डॉलर की तुलना में) पर पहुंच गईं, वहीं केन्याई चाय चालू वर्ष में 3 डॉलर प्रति किलोग्राम के भाव पर पहुंच चुकी है जबकि 2016 के सात महीनों के दौरान इसका भाव 2.30 डॉलर प्रति किलोग्राम के आसपास था। 

 
हालांकि भारतीय चाय की औसत नीलामी कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन चाय कीमतें सभी गुणवत्ता ग्रेड के लिए अलग अलग हैं। चालू वर्ष के दौरान चाय कीमतें पिछले साल के 131.5 रुपये किलोग्राम से घटकर 128 रुपये पर रह गईं। इक्रा में कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग्स के सेक्टर हेड उपाध्यक्ष कौशिक दास का कहना है कि हालांकि औसत घरेलू नीलामी कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन सभी ग्रेडों की चाय के भाव में अंतर है और बेहतर गुणवत्ता की चाय पिछले साल के मुकाबले अच्छे भाव पर बिक रही है, वहीं मध्यम दर्जे की चाय की कीमतों में नरमी का रुझान देखा गया है। चाय की वैश्विक रूप से घट रही उपलब्धता से ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय नीलामी केंद्रों में चाय कीमतों में तेजी बने रहने की संभावना है, जिससे भविष्य में भारतीय चाय कीमतों के रुझान को मजबूती मिलेगी। दास ने कहा कि अल्पावधि के दौरान प्राप्तियों में संभावित तेजी का लागत दबाव के बावजूद 2017-2018 में थोक विक्रेता भारतीय चाय कंपनियों के प्रदर्शन पर काफी हद तक अनुकूल असर दिखेगा। 
 
जहां भारत और श्रीलंका ने हाल के महीनों में अपने फसल नुकसान की भरपाई की है, वहीं 2017 की पहली तिमाही के दौरान केन्या द्वारा मई-जुलाई, 2017 के दौरान उत्पादन में कुछ सुधार के बावजूद चालू वर्ष की दूसरी छमाही में तेजी दर्ज किए जाने की संभावना नहीं है। 2017 के पूरे वर्ष के लिए, केन्याई चाय उत्पादन पूर्ववर्ती वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत कम बने रहने का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप 2017 के लिए कुल वैश्विक चाय उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम रहेगा। 
 
हालांकि सात महीनों के दौरान कुल भारतीय निर्यात बढ़ा है, लेकिन पूरे भारत की निर्यात प्राप्तियां काफी हद तक स्थिर बनी रहीं। दास ने कहा कि इसकी मुख्य वजह पिछले सीजन की बची हुई चाय की बिक्री, दार्जिलिंग चाय की किल्लत और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में तेजी रही। उन्होंने कहा कि उन्हें कुल भारतीय निर्यात प्राप्तियों में तेजी की संभावना को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चाय की अच्छी मांग से मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे घरेलू कीमत रुझानों को भी समर्थन मिलने की संभावना है।
 
वित्त वर्ष 2015 से वित्तीय प्रदर्शन में भारी गिरावट दर्ज करने के बाद कीमतों में संभावित तेजी की मदद से वित्त वर्ष 2018 में थोक चाय कंपनियों के लिए मुनाफा मार्जिन और डेट कवरेज संकेतकों में सुधार आने की संभावना है। इसके अलावा, उत्पादन बढऩे, जीएसटी व्यवस्था के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल होने जैसे बदलावों से भी प्रदर्शन को मदद मिलने की संभावना है। दास का कहना है कि हालांकि संपूर्ण रूप से सुधार की रफ्तार लगातार लागत दबाव (मुख्य रूप से बढ़ती पारिश्रमिक दर की वजह से) की वजह से सीमित होगी। 
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