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इस्पात मिलों को और दाम गिरने की आस

दिलीप कुमार झा | मुंबई Oct 13, 2017 09:27 PM IST

लौह अयस्क के दामों में सितंबर की वैश्विक गिरावट से अलग एनएमडीसी द्वारा की गईमामूली सी कमी को देखते हुए घरेलू इस्पात मिलों को निकट भविष्य में इस्पात विनिर्माण के इस प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में और कटौती की संभावना नजर आ रही है। सितंबर में वैश्विक बाजार में 62 प्रतिशत लौह तत्त्व वाले बेंचमार्क लौह अयस्क के दामों में आश्चर्यजनक रूप से 21.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। महीने के आखिर में इसके दाम 62.1 डॉलर प्रति टन रहे। इसी प्रकार, 58 प्रतिशत शुद्धता वाले लौह अयस्क चूर्ण के दाम सितंबर में 17.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 46.4 डॉलर प्रति टन पर बंद हुए।
 
हालांकि, इसके विपरीत लौह अयस्क का खनन करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की एनएमडीसी ने अक्टूबर में अपने बेंचमार्क लौह अयस्क की कीमतों में दोनों खंडों - पिंडों और चूर्ण में 100 रुपये की कटौती की है। दामों में मौजूदा कटौती के साथ ही लौह अयस्क पिंड और चूर्ण के दाम अब क्रमश: 2,300 रुपये प्रति टन और 2,060 रुपये प्रति टन बोले जा रहे हैं। आमतौर पर सरकारी स्वामित्व वाली एनएमडीसी स्थानीय इस्पात मिलों के साथ-साथ पिछले महीने के दौरान वैश्विक बाजारों की कीमतों के आधार पर भारतीय मिलों के लिए लौह अयस्क के दामों को संशोधित करती है।
 
खनन व्यापार कंपनी के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने कहा कि अक्टूबर 2017 के लिए एनएमडीसी की लौह अयस्क के दामों में कटौती इस्पात विनिर्माण के इस कच्चे माल की सितंबर की वैश्विक कीमतों में गिरावट से काफी कम रही है। इसका मतलब यह है कि आगे दामों में कटौती की व्यापक संभावना है। लेकिन सीमित आपूर्ति होने के साथ ही घरेलू मांग में रही मजबूती को देखते हुए यह कीमत कटौती शायद उतनी ज्यादा न हो, जितनी कि वैश्विक बाजारों में देखी गई है।
 
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषक गौतम चक्रवर्ती ने कहा कि भारत में सपाट और लंबे उत्पादों के दाम दबाव में रहे हैं और पिछले तीन-चार हफ्तों से गिरते जा रहे हैं, जबकि लौह अयस्क में मजबूती रही है। यह टाटा स्टील जैसे एकीकृत भागीदारों के लिए फायदेमंद होगा, जबकि गैर-एकीकृत भागीदार मजबूत लौह अयस्क के दामों से विवश रहेंगे। चीन में इस्पात उत्पादन में कटौती की संभावना से वैश्विक बाजारों में लौह अयस्क के दामों में मंद मांग और लगातार अधिक आपूर्ति के कारण गिरावट आई है। यदि चीन वादे के अनुसार शीतकाल के प्रदूषण से दो-दो हाथ करता है और उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कमी करता है, तो इससे कच्चे इस्पात का उत्पादन करीब 4.567 करोड़ टन घट जाएगा, जो चीन के कुल उत्पादन का लगभग छह प्रतिशत बैठता है। दरअसल, चीन की उत्पादन क्षमता में कोई कटौती नहीं हुई है। इसलिए लौह अयस्क की कीमतें अधिक आपूर्ति की संभावनाओं से गिर रही हैं, जबकि इस्पात की कीमतों में उत्पादन में कटौती की उम्मीद से मजबूती आई है।
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