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उत्पादन हुआ बंद तो हावी हुई नेपाल चाय

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Oct 20, 2017 08:45 PM IST

 

दार्जिलिंग में करीब 87 चाय बागानों में 100 दिनों से ज्यादा के कामचलाऊ प्रबंध के बाद परिचालन शुरू हो गया है लेकिन उनकी समस्या अब भी खत्म नहीं हुई है। देश प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र में संकट गहराता नजर आ रहा है। इन बागानों में जुलाई के मध्य में अचानक उत्पादन बंद हो गया। दार्जिलिंग चाय की नीलामी भी धीरे-धीरे बंद हो गई और ऐसे में इस दौरान नेपाल की चाय भारतीय निर्यातकों और चाय निर्माताओं के बीच लोकप्रिय हो गई। कलकत्ता चाय व्यापारी संगठन के अध्यक्ष अंशुमान कनोरिया का कहना है, 'कई निर्यातकों को दार्जिलिंग चाय के बजाय नेपाल चाय से संतोष करना पड़ा सुगंध और स्वाद की गुणवत्ता बरकरार रखी जा सके। दार्जिलिंग चाय काफी लंबे समय से उपलब्ध नहीं थी ऐसे में निर्यातकों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।' 
 
नेपाल चाय खासतौर पर इल्लम किस्म, दार्जिलिंग चाय की तरह ही दिखती है और इसकी सुगंध भी बिल्कुल वैसी ही है। यहां तक की चाय के विशेषज्ञ भी इसके बीच में अंतर नहीं कर सकते हैं। निर्यात के दौरान इसे नेपाल की चाय के लेबल के साथ या फिर देश की चाय की किस्मों या इंडियन ब्लैक टी के तौर पर विदेशी खरीदारों को बेचा जाता था। नेपाल की चाय का आयात और इसके बाद इसका उपभोग और देश के चाय निर्माताओं द्वारा निर्यात कोई नई बात नहीं है लेकिन यह लोकप्रिय तब हुई जब दार्जिलिंग चाय की नीलामी खत्म होने के साथ निजी बिक्री भी बंद हो गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बिक्री में नेपाल की चाय की कीमतें दार्जिलिंग चाय के मुकाबले 60 फीसदी कम हैं। 
 
निर्यातकों का कहना है कि उन्हें इस व्यवस्था पर ही निर्भर रहना पड़ेगा क्योंकि दार्जिलिंग के चाय उत्पादक बिक्री लायक मात्रा में चाय की आपूर्ति सबसे बेहतर खरीदारी के सीजन (जून-अगस्त) में भी नहीं करा पा रहे हैं ऐसे में उनकी कमाई और मुनाफा दोनों ही दबाव में है। एक निर्यातक का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार  पहले की चाय की तरह ही इस स्वाद और सुगंध (दार्जिलिंग चाय जैसी) को बनाए रखने में दिलचस्पी लेते हैं। ऐसे हालात में उन्हें खरीदारी की इजाजत के साथ नेपाल चाय का इस्तेमाल करना पड़ा। 
 
हालांकि उद्योग अब कई पहलुओं पर विचार कर रहा है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय खरीदार नेपाल की चाय का अनुभव लेने लगे हैं जिसका स्वाद कमोबेश दार्जिलिंग चाय की तरह ही है और वहीं दार्जिलिंग के चाय बगानों में हालात सामान्य होने में अब भी अनिश्चितता कायम है। दार्जिलिंग टी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और बगारिया समूह के अध्यक्ष एस एस बगाडिय़ा का कहना है, 'दार्जिलिंग चाय के मुकाबले नेपाल को कीमतों के स्तर पर अच्छी प्रतिस्पद्र्धा का फायदा मिल रहा है, ऐसे में मुमकिन है कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार स्थायी रूप से नेपाल की चाय और भारत की परंपरागत चाय किस्मों को तरजीह देने लगे ऐसे में दार्जिलिंग चाय के सामने वैश्विक बाजार को खोने का खतरा हो सकता है। इस साल भी कम उत्पादन हो सकता है और उत्पादन मिला-जुला होगा।' दार्जिलिंग में चार मौसम में अलग तरह की पत्तियां निकलती हैं और उनका फ्लेवर भी अलग होता है जिसके मुताबिक कीमतें तय होती हैं। चाय की पत्तियां एक खास महीने में कटती है क्योंकि चाय के पौधे की अपनी गुणवत्ता सीजन के मुताबिक बदलती भी है। वहीं नेपाल की चाय की गुणवत्ता एक समान ही रहती है।
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