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खनिज उपयोग के नियम होंगे और आसान

मेघा मनचंदा | नई दिल्ली Oct 20, 2017 08:46 PM IST

सरकार बिना बरबादी के खनन को प्रोत्साहित करने के लिए अंतिम उपयोगकर्ता उद्योगों को आïवंटित खदानों में उत्खनित अतिरिक्त खनिज की बिक्री सीमा में रियायत दे सकती है। केंद्र सरकार ने पहले योजना बनाई थी कि कुल उत्खनित मात्रा में से 10 फीसदी की खुले बाजार में बिक्री की मंजूरी दी जाए। इस समय जिन कंपनियों को अपनी परियोजनाओं के लिए खदान आवंटित हैं, वे उत्खनित खनिजों का केवल परियोजना में ही इस्तेमाल कर सकती हैं। उनके लिए इसकी बिक्री करने पर पूरी तरह रोक है। 
 
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि खदानों से उत्खनित किसी भी खनिज की बरबादी नहीं होनी चाहिए, इसलिए खनिक को खनिज को खुले बाजार में बेचने या निर्यात करने की मंजूरी दी जानी चाहिए। खनन मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस समाचार-पत्र को बताया, 'अगर हम इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं और अगर किसी (दूसरे देश) में इसकी मांग है तो वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन अगर बिक्री मात्रा पर सीमा होगी तो यह बेकार जाएगा।' 
 
खनिज नीलामी नियम के संशोधित प्रारूप में प्रस्ताव रखा गया है कि कंपनियों को उत्खनित खनिज में से 10 फीसदी की खुले बाजार में बिक्री की छूट दी जाएगी। हालांकि उद्योग सरकार के इस कदम को निजी क्षेत्र को लुभाने के लिए नाकाफी मानता है। उसकी मांग है कि कंपनियों को खदान और उसके उत्पादन पर पूरा अधिकार दिया जाना चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि एक बार जब सरकार खदानों की नीलामी कर देती है तो फिर उसे खदान मालिक को यह फैसला करने देना चाहिए कि संयंत्र की जरूरत पूरी होने के बाद वह शेष उत्पादित खनिज का क्या करना चाहता है। पिछले महीने खनन मंत्रालय ने खनिज (नीलामी) नियम 2015 में संशोधन के लिए खनिज नीलामी संशोधन नियम 2017 के प्रारूप पर सुझाव आमंत्रित किए थे।  
 
खनन मंत्रालय ने ऑफशोर एरियाज मिनरल (डेवलपमेंट ऐंड रेग्यूलेशन) ऐक्ट 2002 में संशोधन के लिए प्रस्तावित विधेयक पर भी विभिन्न हितधारकों के सुझाव आमंत्रित किए थे। इस विधेयक का मकसद ऑफशोर क्षेत्रों में खनिज नीलामी के पारदर्शी और प्रभावी नियम लागू करना है। यह कदम निवेशकों के लिए खनिज ब्लॉक की नीलामी को ज्यादा प्रभावी और आकर्षक बनाने के लिए उठाया जा रहा है। 
 
एक पूर्व सरकारी अधिकारी ने कहा, 'खनिज उत्पादित करने वाली कंपनी पर केवल निर्यात प्रतिबंध होने चाहिए। लेकिन सरकार को यह फैसला नहीं लेना चाहिए कि एक कंपनी कितना उत्पादन करेगी, वह इसे अपने लिए इस्तेमाल करेगी या इसकी खुले बाजार में बिक्री करेगी। अगर खनिज देश के भीतर इस्तेमाल किया जा रहा है तो इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।' पिछले साल मार्च में सरकार ने खनिज एवं खदान (विकास एवं नियमन) अधिनियम (एमएमडीआर ऐक्ट) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसमें आवंटित कैप्टिव खदान की नीलामी से इतर प्रक्रिया के जरिये हस्तांतरण की मंजूरी के प्रावधान को शामिल किया गया था। 
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