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अप्रैल-सितंबर में प्रमुख बंदरगाहों पर माल की आवाजाही में बढ़ोतरी

जयजित दास | भुवनेश्वर Oct 20, 2017 08:46 PM IST

लौह अयस्क और तरल माल की आवाजाही की बदौलत प्रमुख बंदरगाहों पर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर अवधि में माल की आवाजाही बढ़ी है। समीक्षाधीन अवधि में पेलेट सहित लौह अयस्क की आवाजाही 23.48 फीसदी बढ़ी है। लौह अयस्क की आवाजाही में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा फायदा कांडला, पारादीप, न्यू मुरगाव और न्यू मेंगलूरु को हुआ है। लौह अयस्क की आवाजाही में बढ़ोतरी निर्यात में सुधार और अच्छी मांग के चलते सुदूरवर्ती इलाकों को अयस्क भेजा जाना है। 

 
लौह अयस्क के बाद प्रमुख बंदरगाहों पर तेल, एलपीजी और एलएनजी समेत तरल माल की आïवाजाही में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में तरल माल की आवाजाही में 7.13 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारतीय बंदरगाह संघ के आंकड़ों के मुताबिक लौह अयस्क और तरल माल की आवाजाही में भारी बढ़ोतरी के बावजूद प्रमुख बंदरगाहों ने सितंबर के अंत में महज 3.24 फीसदी वृद्धि दर्ज की है। कोच्चि बंदरगाह 19.62 फीसदी वृद्धि के साथ अन्य सभी बंदरगाहों से आगे रहा। कोलकाता और पारादीप जैसे पूर्वी तटीय बंदरगाहों ने माल की आवाजाही में 11 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की।
 
हालांकि विशाखापत्तनम, कामाराजार (एन्नोर),  चिंदमबरनार और मुरगाव बंदरगाह ने कुल माल आवाजाही में गिरावट दर्ज की है। कच्चे एवं तैयार उर्वरक और कोकिंग कोल जैसी अन्य अहम जिंसों की आवाजाही में कमी से कुल माल आवाजाही में कमजोर वृद्धि हुई है। कच्चे उर्वरकों की आवाजाही में 4.2 फीसदी गिरावट आई है, जबकि तैयार उर्वरकों की आवाजाही 2.55 फीसदी घटी है। आलोच्य अवधि में ताप या स्टीम कोयले की आवाजाही 16.37 फीसदी घटी है, जो किसी एक जिंस में सबसे अधिक गिरावट है। थर्मल कोयले की कम आवाजाही इसलिए रही क्योंकि घरेलू कोयले की बेहतर उपलब्धता के कारण आयात में गिरावट रही। इस साल अप्रैल से जुलाई तक देश में 6.77 करोड़ टन कोयले का आयात हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 8.5 फीसदी कम है। 
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