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अलौह धातु कंपनियों की चमक बढ़ी

दिलीप कुमार झा | मुंबई Oct 23, 2017 09:48 PM IST

भारतीय धातु निर्माताओं के मुनाफे में जुलाई-सितंबर तिमाही में बड़ा सुधार आने का अनुमान है। धातु निर्माताओं को वैश्विक बाजारों में धातुओं की कीमतों में आई भारी तेजी का फायदा मिल सकता है। जहां लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर सीसा और जस्ता कीमतों में सितंबर तिमाही के दौरान 11 और 17 फीसदी तक की वृद्घि दर्ज की गई है, वहीं तांबा और एल्युमीनियम में 10 और 11 फीसदी की तेजी आई है। अलौह धातु कंपनियों ने बढ़ रही जिंस कीमतों, शानदार बिक्री वृद्घि और उत्पादन लागत में नरमी की मदद से पिछले एक साल में मार्जिन में अच्छी तेजी दर्ज की है। हालांकि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में मार्जिन पर रुपये में तेजी, धातुओं की कीमतों में गिरावट और ऊंची उत्पादन लागत की वजह से दबाव देखा गया था। इसे देखते हुए उनके वित्तीय परिणाम में सुधार धातु उत्पादकों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। हालांकि रुपये में तेजी बेस मेटल उत्पादकों के लिए धातु कीमतों में तेजी से मिली बढ़त को प्रभावित कर सकती है।
 
डॉयचे बैंक में शोध विश्लेषक अभय लैजावाला ने एक ताजा रिपोर्ट में कहा, 'निफ्टी मेटल सूचकांक की कंपनियों द्वारा आय में सालाना आधार पर 143 फीसदी तक का इजाफा होने की संभावना है। हमें उम्मीद है कि धातु कंपनियां मजबूत वैश्विक जिंस कीमतों की मदद से मजबूत आय वृद्घि दर्ज करेंगी।' इसी रुझान को दर्शाते हुए हिंदुस्तान जिंक ने सितंबर तिमाही में अपने शुद्घ लाभ में शानदार तेजी दर्ज की है। ऊंची कीमतों और बिक्री की मदद से कंपनी का शुद्घ लाभ सितंबर तिमाही में 34 फीसदी बढ़कर 2,545 करोड़ रुपये पर रहा है। वहीं राजस्व सालाना आधार पर 37 फीसदी तक बढ़कर 5,232 करोड़ रुपये पर रहा। हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन अग्निवेश अग्रवाल ने सितंबर तिमाही के लिए वित्तीय प्रदर्शन में मजबूती की मुख्य वजह एलएमई कीमतों में तेजी और चांदी की बिक्री को बताया है। 
 
इस बीच, ऊंची एल्युमीनियम कीमतें हिंडाल्को और नालको समेत विभिन्न एल्युमीनियम उत्पादकों के वित्तीय प्रदर्शन को मजबूत बनाने के लिए तैयार हैं। रिलायंस सिक्योरिटीज में विश्लेषक कुणाल मोतीशॉ का मानना है कि हिंडाल्को का मुख्य परिचालन मुनाफा ऊंची कीमतों की वजह से सालाना आधार पर 12 फीसदी तक बढ़ेगा। उनका कहना है कि एलएमई कीमतें चीन में संयंत्रों के बंद होने की वजह से भविष्य में नरम पडऩे की संभावना है। औसत एलएमई एल्युमीनियम कीमतें पिछली तिमाही के दौरान 5.2 फीसदी तक और सालाना आधार पर 24 फीसदी बढ़कर सितंबर तिमाही में 2,009 डॉलर प्रति टन पर रहीं। दिलचस्प तथ्य यह है कि एल्युमीनियम कीमतें बढ़कर मौजूदा समय में 2,140 डॉलर प्रति टन पर कारोबार कर रही हैं। 
 
इलारा सिक्योरिटीज में विश्लेषक रवि सोडा ने कहा, 'सितंबर तिमाही में वेदांत का समेकित एबिटा कंपनी के जस्ता, तांबा और बिजली व्यवसायों में मजबूत मुनाफे के साथ 17 फीसदी तक बढऩे की संभावना है। हालांकि कंपनी के एल्युमीनियम व्यवसाय पर ऊंची बिजली और एल्युमिना लागत का प्रभाव पड़ सकता है। वहीं हिंडाल्को कर मुख्य एबिटा 16 प्रतिशत तक बढ़ेगा। इसे ऊंची बिक्री और कीमतों के साथ साथ उसके तांबा व्यवसाय के रिफाइनिंग शुल्क मार्जिन से भी मदद मिलेगी।' इसी तरह की प्रतिक्रिया जताते हुए आईआईएफएल के विश्लेषक तारंग भानुशाली ने भी कहा कि जिंस कीमतों में सुधार से तीसरी तिमाही में मार्जिन वृद्घि को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि रुपया और अधिक चढ़ा है जबकि उत्पादन लागत बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है। 
कीवर्ड non metal, jins,

  
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