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सितंबर तिमाही में सोने का आयात बढ़ा

राजेश भयानी | मुंबई Oct 26, 2017 09:28 PM IST

जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स का आकलन

सितंबर तिमाही में तस्करी भी अधिक रही
सितंबर तिमाही में सोने का आधिकारिक आयात 66 फीसदी बढ़कर 132.7 टन रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 79.8 टन था
अगर इस आयात को भी शामिल किया जाए तो तीसरी तिमाही का आयात 165.7 टन बैठता है, जो पिछले साल की सितंबर तिमाही से दोगुना है

जीएसटी लागू होने, धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की अधिसूचना जारी होने, निर्यातक कंपनियों पर प्रतिबंधों और कम मौसमी मांग के सीजन के कारण पैदा हुई दिक्कतों के बावजूद सोने का आयात सितंबर तिमाही में दोगुना रहा। जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स के आज जारी तीसरे तिमाही के सोने के सर्वेक्षण के मुताबिक, 'सितंबर तिमाही में सोने का आधिकारिक आयात 66 फीसदी बढ़कर 132.7 टन रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 79.8 टन था।'

हालांकि इन आंकड़ों में सोने का आधिकारिक आयात ही शामिल है। जीएसटी लागू होने के बाद आयात नीति में खामियों के कारण दक्षिण कोरिया से मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत जुलाई और अगस्त में 33 टन सोने के आयात का अनुमान है। भारत ने दक्षिण कोरिया के साथ यह एफटीए वर्ष 2009 में किया था और वर्ष 2017 में आयात शुल्क शून्य था।  अगर इस आयात को भी शामिल किया जाए तो तीसरी तिमाही का आयात 165.7 टन बैठता है, जो पिछले साल की सितंबर तिमाही से दोगुना है। सितंबर तिमाही के दौरान सोने का अवैध आयात या तस्करी भी अधिक रही। जीएफएमएस के सर्वेक्षण में कहा गया है कि वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में अवैध रूप से 46 टन सोने का आयात हुआ, जो वर्ष 2016 की तीसरी तिमाही में 25.2 टन था। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अवैध रूप से आयातित सोने का आधिकारिक सोने की जगह इस्तेमाल किया गया। सराफ अपने ग्राहकों को तस्करी का सोना बेच रहे थे। लेकिन वे इसे पुराने गहनों के बदले बिक्री के रूप में दिखा रहे थे। आयात ऐसे समय बढ़ा है, जब जीएसटी के बाद सोने की मांग घटी है। सरकार ने अगस्त में पूरे आभूषण कारोबार को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत लाने की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत ग्राहकों के लिए सराफों को अपने पहचान पत्र की प्रति देना अनिवार्य किया गया था। 

सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में सोने की मांग सितंबर तिमाही में 141 टन (17 फीसदी अधिक) रही, जबकि निवेश मांग 10 फीसदी बढ़कर 24.3 टन रही। इस तरह आलोच्य तिमाही में सोने की कुल मांग 165 टन रही। वैश्विक स्तर पर सोने की कुल मांग 685.6 टन रही, जो 2016 की सितंबर तिमाही की मांग 639.4 टन से 7.3 फीसदी अधिक है।  सोने की कीमत 1,300 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बनी हुई है, जिससे मांग सीमित बनी हुई है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि सितंबर में सोने की मांग का स्तर दो साल पहले की तुलना में अब भी करीब 22 फीसदी कम है। सर्वेक्षण में सोने की मांग अगले साल अच्छी रहने का अनुमान जताया गया है। इसमें कहा गया है कि 1,300 डॉलर से नीचे आ रही कीमतें एक वाजिब गिरावट है क्योंकि कीमतें काफी ऊपर जा चुकी हैं। मेरा मानना है कि सोने ने इस साल के अंत में 1,300 डॉलर से ऊपर जाने का मजबूत आधार बना लिया है। सोने की कीमतों में 2018 में भी इजाफा होगा। 

वर्ष 2018 में सोने के दाम 1,360 डॉलर के औसत और 1,450 डॉलर की ऊंचाई जाने के आसार हैं। इसकी एक वजह यह है कि अहम वैश्विक शेयर बाजारों में जोखिम बढ़ रहा है। हाल के सप्ताहों में एसऐंडपी 500, डैक्स और एफटीएसई अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि शेयर बाजारों में जोखिम बढऩे से कुछ निवेशक सोने में अपना निवेश बढ़ाएंगे। सोने को भू-राजनैतिक तनाव के बरकरार रहने से भी मदद मिलेगी।
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