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सितंबर में बढ़ा रेडीमेड गारमेंट का निर्यात

टी ई नरसिम्हन | चेन्नई Oct 26, 2017 09:28 PM IST

लगातार तीन महीने तक गिरावट के बाद रेडीमेड गारमेंट (आरएमजी) का निर्यात सितंबर में रुपये के संदर्भ में 25 प्रतिशत और डॉलर के संदर्भ में 30 प्रतिशत तक बढ़ा। लेकिन निर्यातकों का कहना है कि निर्यात में तेजी की यह रफ्तार बरकरार नहीं रहेगी क्योंकि सरकारी नीतियां अनुकूल नहीं हैं। तैयार परिधान का निर्यात एक साल पहले के 8,583.55 करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर 2017 में 10,707 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। डॉलर संदर्भ में यह 1.662 अरब डॉलर रहा। कुल निर्यात में से 52 प्रतिशत बुने हुए उत्पाद और 48 प्रतिशत निर्यात में निटवियर शामिल हैं। इस सेक्टर ने अप्रैल में वर्ष की शुरुआत रुपये के संदर्भ में 27.60 फीसदी और डॉलर के संदर्भ में 31.65 फीसदी की वृद्घि के साथ की। लेकिन बाद के महीनों में वृद्घि (रुपये के संदर्भ में) सिर्फ 3.84 फीसदी ही दर्ज की गई। निर्यातकों का मानना है कि इस साल गारमेंट निर्यात पिछले साल के कुल 17.358 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा, क्योंकि सामान्य तौर पर दूसरी छमाही में निर्यात में तेजी आती है।

 
जनवरी, फरवरी और मार्च आरएमजी निर्यात के लिए महत्त्वपूर्ण महीने हैं। पिछले कुछ वर्षों से इन्हीं तीन महीनों के दौरान लगभग 30-40 फीसदी निर्यात होता है। निर्यातक मुख्य रूप से पश्चिमी बाजारों में आगामी क्रिसमस को तेजी के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं। दूसरी वजह यह भी है कि दुकानदार जीएसटी की वजह से इक_ïे हुए माल को निकालने पर जोर दे रहे हैं। तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजा षडमुगम कहते हैं कि लोग अब नई कर व्यवस्था से अवगत हो रहे हैं। पिछले तीन महीनों में हालांकि वैश्विक मांग बढ़ी, लेकिन निर्यातक कर संबंधित समस्याओं की वजह से इसे पूरा नहीं कर सके हैं। एक अन्य निर्यातक ने कहा कि जब तक भारत यूरोपीय देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर नहीं करता, तब तक निर्यातकों की समस्या बरकरार रहेगी। 
 
सूती धागा निर्यातकों ने प्रभु से मांगी मदद 
 
सूती धागे का निर्यात लगातार तीन साल से घट रहा है, इसलिए उद्योग की संस्थाओं ने निर्यात प्रोत्साहनों और नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की है। निर्यातकों ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु को एक व्यापक विश्लेषण सौंपा है, जो यह दिखाता है कि 3.5 अरब डॉलर का सूती धागा निर्यात खंड तेजी से सिकुड़ रहा है। इस खंड का देश के कुल कपड़ा निर्यात में करीब 10 फीसदी हिस्सा है। यह कपड़ा क्षेत्र के उन कुछेक खंडों में से एक है, जिनमें भारत के निर्यात का दबदबा रहा है। 
 
वर्ष 2016-17 में सूती धागे का निर्यात 7.7 फीसदी घटा है। कारोबारी वजहों के अलावा धागे और कपड़े दोनों पर 5 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब तक उद्योग पर कर नहीं लगता था। रेटिंग एजेंसी इक्रा की हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल की तुलना में रुपये के मजबूत होने और पिछले 6 से 9 महीनों के दौरान कच्चे माल की ऊंची लागत के कारण उद्योग पर बुरा असर पड़ा है। निर्यातकों का दावा है कि घरेलू मांग नहीं बढ़ रही है, इसलिए कताई मिलों में निवेश रुक गया है। इससे सूती धागे को बनाने की लागत बढ़ रही है।  इन हालात को देखते हुए उद्योग की संस्थाओं ने कहा है कि सूती धागे को भी मर्चेन्डाइज एक्सपोट्र्स फ्रॉम इंडिया स्कीम और इंटरेस्ट इक्वलाइजेशन स्कीम के लाभ मिलने चाहिए। ये लाभ हस्त-निर्मित धागे को पहले से ही मिल रहे हैं। उन्होंने हाल में ड्रॉबैक दरों में संशोधन का मसला भी उठाया है।
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