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उड़द की फली के दाम गिरने से मध्य प्रदेश के किसान हलकान

अभिषेक वाघमारे | नई दिल्ली Oct 29, 2017 09:49 PM IST

भोपाल के कृषि बाजार में अक्टूबर माह के पिछले सप्ताह में उड़द की फली के दाम गिरकर 1,500-1,750 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं जो सरकार द्वारा 2017 के खरीफ सीजन के लिए निर्धारित 5,400 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम हैं। यहां तक ​​कि राजस्थान की सीमा पर स्थित मालवा क्षेत्र के नीमच में भी दाम गिरकर एमएसपी के 60 प्रतिशत पर 3,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए है, जहां उड़द की फली की आवक राज्य में अभी तक सबसे ज्यादा रही है। बुआई क्षेत्र में 50 फीसदी की उछाल की वजह से आपूर्ति का आधिक्य रहा है।
 
थोक के दामों में आने वाली गिरावट से मुकाबला करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी तरह की पहली योजना 'मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना' की घोषणा की है। इसमें बाजार मूल्य और एमएसपी के अंतर का भुगतान करने का वादा किया गया है। अगर बाजार मूल्य  एमएसपी से कम रहता है तो (आठ प्रमुख खरीफ फसलों के लिए) लाभार्थी किसान के बैंक खाते में यह रकम डाली जाएगी।
 
हालांकि, मध्य प्रदेश में 54 लाख पात्र किसानों में से केवल एक-तिहाई - 19 लाख ही इस योजना में पंजीकृत हो पाएं हैं। जिसका अर्थ यह है कि अधिकांश किसान अपनी उपज के लिए एमएसपी पर भुगतान प्राप्त नहीं कर पाएंगे। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मामले को और बिगाड़ते हुए कई व्यापारियों ने इस योजना के फलस्वरूप अपनी देनदारियों में कटौती कर बनावटी ढंग से उड़द की फली की थोक कीमतें गिराकर एमएसपी के 40 प्रतिशत के स्तर पर कर दी हैं। इससे एक-तिहाई किसानों की मौजूदा आमदनी में कमी आ गई है और यह सरकार द्वारा शेष राशि का हस्तांतरण किए जाने तक टल गई है। शेष दो-तिहाई किसानों के लिए आगे मुश्किल समय है।
 
कुछ सरकारी अधिकारियों के पास इसका एक अलग कारण है। मध्य प्रदेश के कृषि आयुक्त प्रेमचंद मीणा ने कहा कि बाजार में खराब गुणवत्ता वाली उड़द की आवक होने से कीमतों में गिरावट आई है। होशंगाबाद जिले की पिपरिया मंडी में 25 अक्टूबर को थोक कीमतें निम्रतम स्तर 800 रुपये प्रति क्विंटल पर दर्ज की गई हैं। यहां के बाजार निरीक्षक रमेश परमार ने कहा कि अनियमित मॉनसून और उपज तथा भंडारण के समय भारी बारिश की वजह से उड़द की गुणवत्ता में कमी आई है। उन्होंने कहा कि दामों का 800 रुपये का निम्र स्तर अनियमित है। वे अब भी मानते हैं कि जिस बाजार को वे देखते हैं, वहां कीमतें 1,700-2,400 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में हैं।
 
दाल व्यापारियों ने बाजार में हो रही खराब गुणवत्ता वाली उड़द की फली को कीमतों में गिरावट का जिम्मेदार माना है। 2012 के सीजन में  एमएसपी में 30 प्रतिशत की वृद्धि नजर आई थी जो एक दशक में सबसे अधिक थी। उस सीजन में भी उड़द की फली की थोक कीमतों में गिरावट देखी गई थी। तब इसके दाम 4,300 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी के मुकाबले 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे चले गए थे। लेकिन इस दफा कीमतों में ऐसी गिरावट पहली बार हुई है।
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