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अद्विक फूड्स लाई कैमल मिल्क पाउडर, चॉकलेट

सोहिनी दास | अहमदाबाद Oct 29, 2017 09:51 PM IST

भले ही अमूल लंबे समय से कैमल मिल्क पेश करने की योजना पर विचार कर रही हो, लेकिन बीकानेर की निजी कंपनी अद्विक फूड्ïस ने न सिर्फ कैमल मिल्क, बल्कि दुग्ध पाउडर और चॉकलेट को भी भारतीय उपभोक्ताओं के बीच पेश कर उसे झटका दिया है। इंसुलिन और विटामिन समेत कई स्वास्थ्य फायदों को ध्यान में रखते हुए ऊंटनी का दूध अब डेयरी उत्पाद की खास श्रेणी के तौर पर उभर रहा है। अद्विक इस दूध को 400-450 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बेच रही है। महानगरों के उपभोक्ता ऊंटनी के दूध के गुणों से वाकिफ हो रहे हैं। 
 
म्यांमार में अपनी नौकरी छोड़ चुके युवा इंजीनियर हितेश राठी द्वारा स्थापित अद्विक (जिसका संस्कृत में मतलब 'खास' है) ने ऊंटनी के दूध को बेचने के लिए ऑनलाइन का विकल्प चुना है और इस दूध को देश में राजस्थान और गुजरात से खरीदा जाता है। अद्विक कैमल मिल्क पाउडर (फ्रीज-ड्रायड मेथड का इस्तेमाल कर) भी बना रही है और इसे भारत और देश से बाहर बेचती है। 
 
लगभग 10-15 लाख रुपये की आरंभिक पूंजी के साथ लगभग दो साल पहले शुरू हुई यह कंपनी मौजूदा समय में हर महीने लगभग 8,000 लीटर कैमल मिल्क की खरीद-फरोख्त कर रही है। परिचालन की शुरुआत राजस्थान में एक गैर-सरकारी संगठन 'लोकहित पशु-पालक संस्थान' (एलपीपीएस) से हर महीने 80-100 लीटर दूध की खरीदारी के साथ हुई थी। राठी ने कहा, 'हमने शुरू से ही खरीद और प्रोसेसिंग के बजाय उत्पाद की मार्केटिंग पर ध्यान केंद्रित किया। हमने ज्यादा संख्या में ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए ऑनलाइन रूट चुना है।' कंपनी देश के सभी हिस्सों में कूरियर सेवा के जरिये जमा हुआ (फ्रोजन) दूध भेजती है। जमा हुआ दूध तीन महीने तक खराब नहीं होता है। वहीं पाउडर के रूप में यह 9 महीने तक खराब नहीं होता है। अद्विक भारत से बाहर भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के जरिये अपने लगभग 10 प्रतिशत उत्पाद बेचती है।
 
राठी ने कहा, 'हम हाल में एमेजॉन के यूएस प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्घ हुए हैं और दुनियाभर के ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए ईबे पर भी बिक्री कर रहे हैं।' हालांकि दुग्ध पाउडर की कीमत लगभग 6,000 रुपये प्रति किलो है, क्योंकि फ्रीज-ड्राइंग प्रक्रिया पारंपरिक डीहाइड्रेशन तकनीक की तुलना में 10 गुना अधिक महंगी है। कंपनी नुकसान पर दूध नहीं बेचे जाने को लेकर बेहद सतर्कता के साथ काम कर रही है और वह परिचालन के पहले साल से ही मुनाफे में चल रही है। राठी और कंपनी के सह-संस्थापक श्रेय कुमार अब कैमल मिल्क साबुन जैसे कॉस्मेटिक उत्पादों के क्षेत्र में भी दस्तक देने की योजना बना रहे हैं। 
 
राठी ने कहा, 'हम कॉस्मेटिक उत्पाद, फ्लेवर्ड मिल्क पाउडर बनाने के साथ साथ अपनी ऑफलाइन उपस्थिति बढ़ाने की संभावना तलाश रहे हैं। चॉकलेट जैसे उत्पाद की बिक्री ऑफलाइन स्टोरों में ज्यादा उपयुक्त है और हम फ्यूचर गु्रप के साथ इस संबंध में समझौता कर चुके हैं और राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र में उनके कुछ आउटलेटों में अपने उत्पादों की बिक्री शुरू की है।'  वहीं अमूल ब्रांड की मालिक गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएम एमएफ) भी इस सेगमेंट में प्रवेश करने की तैयारी कर रही है। जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी ने हाल में कहा कि कैमल मिल्क चॉकलेट पूरे भारत में लगभग दो लाख रिटेलरों पर बेची जाएगी। कच्छ स्थित सरहद डेयरी (जीसीएम एमएफ के साथ संबद्घ को-ऑपरेटिव) कैमल मिल्क प्रोसेसिंग संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में है। 
 
राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) ने कुछ साल पहले सरस ब्रांड के तहत कैमल मिल्क को पेश कर एक नई शुरुआत की थी। लेकिन 2010 के आसपास आरसीडीएफ ने यह उत्पाद बंद कर दिया क्योंकि शुरुआती उत्साह के बाद मांग ठंडी पड़ गई। ऊंटनी के दूध की कम बिक्री और संक्षिप्त शेल्फ लाइफ (खराब नहीं होने की अवधि) की वजह से यह परियोजना अव्यवहार्य हो गई।  राठी कहते हैं कि कैमल मिल्क के लिए बाजार मुख्य रूप से महानगरों तक केंद्रित है और इसे अन्य उपभोक्ताओं तक भी पहुंचाने की जरूरत होगी।    
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