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एथेनॉल की खरीद कीमत 5 फीसदी बढ़ी

दिलीप कुमार झा | मुंबई Nov 01, 2017 09:19 PM IST

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने एथेनॉल की बुनियादी कीमत में 5 फीसदी बढ़ोतरी की है ताकि डिस्टिलरी तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाएं। सीसीईए के एथेनॉल की कीमत बढ़ाने से चीनी क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने एथेनॉल खरीद सीजन 2017-18 (दिसंबर 2017 से शुरू) में इसकी कीमत बढ़ाकर 40.85 रुपये प्रति लीटर करने को मंजूरी दी है। पिछले सीजन में कीमत 38.97 रुपये प्रति लीटर थी। तेल विपणन कंपनियां एथेनॉल पर लगने वाले 18 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और परिवहन लागत का बोझ वहन करेंगी। सीसीईए ने कहा, 'इस कीमत बढ़ोतरी से सरकार को अपनी वह नीति जारी रखने में मदद मिलेगी, जिसमें एथेनॉल आपूतिकर्ताओं को कीमत स्थिरता और लाभकारी कीमत मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी कम करने में मदद मिलेगी, जिससे विदेशी मुद्रा बचेगी और पर्यावरण लाभ भी मिलेंगे।'
 
चीनी मिलों ने कहा कि वे कीमत में बढ़ोतरी से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के लिए ज्यादा एथेनॉल की आपूर्ति करने को प्रोत्साहित होंगी। इससे उनका मुनाफा बढ़ेगा क्योंकि एथेनॉल चीनी उत्पादन के एक उपोत्पाद शीरे से निकलता है। श्री रेणुका शुगर्स के प्रबंध निदेशक नरेंद्र मुरकुंबी ने कहा, 'यह स्वागत योग्य कदम है। इससे मिलों का मुनाफा सुधारेगा और इस साल 3 अरब लीटर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। पिछले 12 महीनों के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी और गन्ने की न्यूनतम कीमत में 8 फीसदी बढ़ोतरी को देखते हुए यह बढ़ोतरी और ज्यादा की जा सकती थी।' 
 
सीसीईए ने नवंबर 2012 में पेट्रोल के साथ 5 फीसदी एथेनॉल के अनिवार्य मिश्रण को मंजूरी दी थी। इसकी अधिसूचना जनवरी 2013 में मोटर स्पिरिट्स ऐक्ट के तहत की गई थी। तेल विपणन कंपनियों को 30 जून 2013 तक पेट्रोल में 5 फीसदी एथेनॉल के मिश्रण और उसके बाद 10 फीसदी मिश्रण का लक्ष्य हासिल करन था। हालांकि कम कीमत की पेशकश के चलते कम आपूर्ति के कारण पेराई सीजन 2015-16 में तेल विपणन कंपनियां 111 करोड़ लीटर एथेनॉल ही खरीद पाईं, जो चार फीसदी मिश्रण के बराबर था। तेल कंपनियां 2016-17 में केवल 71 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीद पाईं, जो केवल 2.5 फीसदी मिश्रण के लिए ही पर्याप्त था। 
 
हालांकि पेराई सीजन 2017-18 में मिलों के 250 लाख टन चीनी उत्पादित करने के आसार हैं, जो 2015-16 के समान है। इस साल इतनी ही मात्रा में शीरे की उपलब्धता है, इसलिए मिलें 111 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूूर्ति कर सकती हैं। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के अविनाश वर्मा ने कहा, 'यह बढ़ोतरी चीनी मिलों को इस साल एथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाने को प्रोत्साहित करेगी।' मिलें तेल विपणन कंपनियों की निविदा में हिस्सा लेने के लिए सीसीईए के कीमत तय करने का इंतजार कर रही थीं। एथेनॉल का चीनी मिलों के सालाना कारोबार में 10 से 15 फीसदी योगदान है। उत्तर प्रदेश की मिलें देश की कुल एथेनॉल आपूर्ति में करीब आधा योगदान देती हैं। बलरामपुर चीनी मिल्स के प्रबंध निदेशक विवेक सरावगी ने कहा, 'हम बाजार से शीरे की खरीद नहीं करते हैं। यह चीनी उत्पादन का एक उपोत्पाद है। इसलिए कच्चे माल पर हमारी अतिरिक्त लागत नहीं आती है। इस तरह एथेनॉल की ज्यादा कीमत मिलने से कंपनी के लाभ में इजाफा होगा।' सीसीईए के फैसले से चीनी कंपनियों के शेयरों में भी तेजी दिखी। बीएसई पर मंगलवार को गायत्री शुगर्स के शेयर की कीमत 12 फीसदी चढ़कर 11.20 रुपये पर पहुंच गई थी। श्री रेणुका शुगर्स, बजाज हिंदुस्तान और सिंभावली शुगर्स के शेयरों में क्रमश: 7.3 फीसदी, 3.3 फीसदी और 2.47 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 
कीवर्ड CCEA, sugar, चीनी सीजन, गन्ने की खेती,

  
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