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चावल की बदौलत बढ़ा कृषि निर्यात

दिलीप कुमार झा | मुंबई Nov 03, 2017 09:53 PM IST

देश का कृषि निर्यात इस साल की अप्रैल से सितंबर तक की अवधि में 13 फीसदी बढ़ा है, जिसमें चावल का अहम योगदान रहा है। वित्त वर्ष 2016-17 में भारत का कृषि निर्यात घटा था। दरअसल यूरोपीय संघ के भारत से आयात पर प्रतिबंध लगाने के डर के कारण विदेशी डीलर भंडारण कर रहे हैं, जिससे भारत से कृषि जिंसों का निर्यात बढ़ा है। यूरोपीय संघ ने 1 नवंबर से गुणवत्ता नियम कड़े कर दिए हैं। 
 
सरकार के स्वामित्व वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों के अनुसार भारत से कृषि उत्पादों का निर्यात अप्रैल से सितंबर 2017 के बीच बढ़कर 8.73 अरब डॉलर रहा है। पिछले साल की इसी अवधि में भारत से 7.69 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का निर्यात हुआ था। हालांकि रुपये के लिहाज से चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में कृषि निर्यात 8.64 फीसदी बढ़कर 56,183 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 51,499 करोड़ रुपये था। 
 
देश से कृषि निर्यात बढऩे में चावल (बासमती  और गैर-बासमती) का अहम योगदान रहा। देश के कुल सालाना कृषि निर्यात में चावल का करीब 44 फीसदी हिस्सा होता है। आलोच्य अवधि में बासमती एवं गैर-बासमती चावल का निर्यात डॉलर के लिहाज से 30 फीसदी और रुपये की दृष्टि से 25 फीसदी बढ़ा है। इसकी वजह यह है कि 1 नवंबर से कड़े गुणवत्ता जांच नियम लागू होने से पहले यूरोपीय खरीदार भंडार कर रहे हैं। 
 
कोहिनूर ब्रांड के बासमती चावल की उत्पादक और निर्यातक कोहिनूर फूड्स लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक गुरनाम अरोड़ा ने कहा, 'यूरोपीय खरीदारों ने गुणवत्ता नियम लागू होने से पहले भंडार किया है क्योंकि उन्हें डर है कि चावल की सीमित मात्रा ही कड़े गुणवत्ता जांच नियमों पर खरी उतर पाएगी। इसलिए आने वाले महीनों में भारत से यूरोपीय संघ को चावल का निर्यात घटेगा। हालांकि इस अवधि में भारत के सबसे बड़े खरीदार ईरान ने भी चावल की बड़ी मात्रा में खरीद की है, जिससे कुल कृषि निर्यात में इजाफा हुआ है।' यूरोपीय संघ के खाद्य नियामक यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (ईएफएसए) ने एपीडा से कहा है कि 1 नवंबर से भारत से आने वाले बासमती चावल को निर्यात से पहले 22 कीटनाशकों के लिए कीटनाशक अंश जांच से गुजरना पड़ेगा। हालांकि एपीडा ने साफ किया है कि प्रोपीकोनाजोल की वर्तमान स्वीकृत न्यूनतम अवशेष सीमा (एमआरएल) 1.5(एमजी/किलोग्राम)/पीपीएम (प्रति 10 लाख पर अंश) है, जिसकी समीक्षा की जा रही है। 
 
यह घटनाक्रम बहुत अहम है क्योंकि यूरोपीय संघ विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियमों को मजबूत बना रहा है। लेकिन भारत बासमती चावल का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक है और पाकिस्तान बहुत बड़े अंतर के साथ दूसरे स्थान पर है। इसलिए यूरोपीय संघ के बासमती की जांच के नियम कड़े करने से वहां इस सुगंधित चावल की किल्लत पैदा हो सकती है। 
 
रोचक बात यह है कि भारत के कुल बासमती चावल निर्यात की कीमत बढ़कर अप्रैल-सितंबर 2017 में बढ़कर 2.13 अरब डॉलर पर पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि में 1.63 अरब डॉलर थी। यूरोपीय स्टॉकिस्टों की मांग में तगड़ी बढ़ोतरी से भारतीय निर्यातकों को इस साल बासमती चावल की कीमत 997 डॉलर प्रति टन मिली है, जबकि पिछले साल उन्हें 789 डॉलर प्रति टन कीमत मिली थी। इस साल अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 21.3 लाख टन रहा है, जो 2016 की इसी अवधि में 20.7 लाख टन था। 
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