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कागज उद्योग की बागान नीति बनाने की मांग

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Nov 05, 2017 08:27 PM IST

कागज उत्पादों के लिए घरेलू मांग बढऩे और मिलों को कच्चे माल की किल्लत का मसला उठाते हुए कागज निर्माताओं ने समग्र औद्योगिक बागान नीति की मांग फिर से तेज कर दी है। इस कई कागज मिलें कच्चे माल की खरीदारी सीधे तौर पर बागान के पेड़ों और पौधों के रूप में करती हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में नियम उद्योग को स्वामित्व की अनुमति नहीं देते हैं। पिछले दिनों वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सी आर चौधरी ने सुझाव दिया कि उद्योग सभी श्रेणियों में रीसाइक्लिंग की अपनी दर बढ़ाकर इसका मुकाबला कर सकता है। चौधरी कागज, कागज उत्पादों और संबंधित उत्पादों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी प्रदर्शनी 'पेपरएक्स 2017' में बोल रहे थे। इस उद्योग के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि मौजूदा समय में भारत में रीसाइक्लिंग 40-50 फीसदी पर है जबकि जापान जैसे विकसित देशों में यह 85 फीसदी से अधिक है। 
 
जेके पेपर के वाइस-चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हर्षपति सिंघानिया ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'इस समय बड़ी कंपनियों का मॉडल कृषि वानिकी है। हमने ओडिशा, आंध्र प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के किसानों के साथ भागीदारी की है, लेकिन मांग लगातार बढ़ रही है जिससे लकड़ी की उपलब्धता एकमात्र सबसे बड़ी समस्या है।' उन्होंने कहा कि सालाना वृद्घि दर औसतन 6-7 फीसदी रहने से उद्योग पर दबाव बढ़ेगा। बोर्ड जैसे विशेष कागज उत्पादों के लिए यह आंकड़ा 10 और 15 प्रतिशत के बीच है। पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले साल निजी उद्योग को बागान उद्देश्यों के लिए 'डीग्रेडेड स्क्रबलैंड' के तौर पर निर्धारित भूमि का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। इस समय देश में वन क्षेत्र 2015 की फॉरेस्ट स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार 2013 की रिपोर्ट के मुकाबले 3.78 लाख हेक्टेयर तक बढ़ा है। वन और पेड़ों से घिरा क्षेत्र 7.942 करोड़ हेक्टेयर या देश के भौगोलिक क्षेत्र का 24.16 प्रतिशत है जो इस सदी के शुरू में लगभग 20 फीसदी के वन क्षेत्र के अनुमान से काफी अधिक है। हालांकि यह भौगोलिक क्षेत्र के 33 फीसदी के नीतिगत लक्ष्य से कम है। 
 
इंडियन पेपर मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ बांगड़ ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हमने पर्यावरण मंत्रालय को प्रस्ताव फिर से सौंप दिया है, लेकिन अभी तक इसका कोई जवाब नहीं आया है। हालांकि हमने भूमि का स्वामित्व नहीं मागा है लेकिन वन विभाग के अधिकारियों के साथ भागीदारी करने और सहमति के आधार पर निर्धारित दरों के हिसाब से उपज की पुनर्खरीद करने को इच्छुक हैं।' 
 
इस समय देश में कागज की प्रति व्यक्ति खपत 9.8 किलोग्राम है जबकि अमेरिका में यह 350 किलोग्राम है। इसका मौजूदा वैश्विक औसत लगभग 58 किलोग्राम है।  उत्पादन सामग्री की किल्लत की वजह से निर्माताओं ने अब लुग्दी और अन्य कच्चा माल विदेश, खासकर एशिया से आयात करने पर जोर दिया है। शेषशायी पेपर एंड बोड्ïर्स लिमिटेड के एक वरिष्ठï अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि उत्पादन लागत अधिक होने से भारतीय कंपनियों की निर्यात योजना को भी बड़ा झटका लगा है। 
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