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आभूषण कंपनियों के शेयर चढ़े

दिलीप कुमार झा | मुंबई Nov 06, 2017 10:02 PM IST

आभूषण कंपनियों के शेयरों में आज शानदार तेजी दर्ज की गई। इसमें टाइटन के दूसरी तिमाही के अच्छे नतीजों, उद्योग की इस सीजन में शानदार बिक्री और सोने के आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग के बाद संगठित क्षेत्र की कंपनियों को भारी लाभ मिलने की उम्मीदों का अहम योगदान रहा।  खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने शुक्रवार को साफ किया था कि सरकार 1 जनवरी 2018 से सोने की आभूषणों की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाएगी ताकि देश के आभूषण क्षेत्र में एकरूपता हो। इस समय सराफ ग्राहकों की जरूरतों और उनकी वित्तीय हैसियत के हिसाब से विभिन्नता शुद्धता स्तर के सोने के गहने बेचते हैं। इस तरह बहुत से सराफ 9 कैरट से लेकर 24 कैरट शुद्धता के आभूषण बेचते हैं। सोमवार को प्रमुख आभूषण कंपनियों के शेयरों में 5 से 19 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई। एमके ग्लोबल में विश्लेषक अमित पुरोहित ने कहा, 'असंगठित से संगठित क्षेत्र में तब्दील होने से टाइटन को अपनी अहम श्रेणियों में सबसे ज्यादा मिलने की संभावना है। पिछली दो तिमहियों के दौरान आभूषण खंड की वृद्धि दर में बढ़ोतरी से हम अचंभित हैं और अब कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में सुधार आ रहा है। हमारा मानना है कि मार्जिन में सुधार का रुझान जारी रहेगा और हम इसे ध्यान में रखते हुए अपने आय के अनुमानों में संशोधन करेंगे।'
 
सिटी रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि टाइटन की बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी जारी है क्योंकि उसकी खुदरा बिक्री वृद्धि  24 फीसदी रही है। इतनी बिक्री उस स्थिति में रही है, जब जीएसटी लागू होने से पहले ग्राहक जुलाई की खरीदारी जून में ही कर चुके थे। इसके अलावा करीब पांच सप्ताह तक केवाईसी की अतिरिक्त जरूरतों के कारण अगस्त-सितंबर में बिक्री थोड़ी कमजोर रही थी। इस बीच घरेलू घरेलू सराफों की प्रतिनिधि संस्था ऑल इंडिया जेम्स ऐंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन (जीजेएफ) ने सरकार से आग्रह किया है कि 18, 19, 23 और 24 कैरेट के गहनों की हॉलमार्किंग को मंजूरी दी जाए ताकि ये ग्रामीण ग्राहकों की मांग के मुताबि हों। 
 
जीजेएफ के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने कहा, 'अन्य शुद्धता स्तर के गहनों की हॉलमार्किंग को मंजूरी देने को लेकर हम सरकार से मिले हैं। ग्रामीण इलाकों में हॉलमार्किंग केंद्रों के उपलब्ध न होने के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए। हमें सकारात्मक जवाब मिलने की उम्मीद है।' हॉलमार्किंग आभूषणों की अनिवार्य बनाए जाने से संगठित कंपनियों को फायदा होगा, लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या सरकार सराफों को 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट से इतर गहनों को पिघलाने के लिए कहेगी। इंडिया बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा, 'अगर हां तो उन पर अतिरिक्त लागत पड़ेगी। इसलिए ऐसे गहनों को पिघलाने पर दोहरे खर्च के बजाय सराफ अंतिम तिथि से पहले अपने पुराने स्टॉक की बिक्री के लिए सोने की कीमतों में छूट देंगे। ऐसे मसलों के समाधान की जरूरत है।' विश्लेषकों ने कहा कि इस त्योहारी और वैवाहिक सीजन पर आभूषण की दुकानों पर भारी तादाद में ग्राहक आ रहे हैं, जिससे उनके लाभ मार्जिन में सुधार होगा। 
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