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प्लाईवुड उद्योग बोला, ज्यादा जीएसटी से उधड़ रही परतें

राजेश भयानी | मुंबई Nov 09, 2017 10:08 PM IST

प्लाईवुड पर 28 प्रतिशत के ऊंचे जीएसटी और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण फिनॉल तथा अन्य रसायनों की बढ़ती कीमतों की वजह से प्लाईवुड और लैमिनेट उद्योग मंदी की मार झेल रहा है। उद्योग के भागीदारों के अनुसार, प्लाईवुड उद्योग की मांग में तेज गिरावट नजर आई है, उद्योग की इकाइयां पहले की तुलना में कम क्षमता पर कार्य कर रही हैं, बिक्री में गिरावट आई है और महत्त्वपूर्ण इकाइयों में बेरोजगारी की खतरा पैदा हो रहा है, जबकि कृषि के अंतर्गत आने वाले वृक्षों की लकड़ी बेचने से होने वाली किसानों की आय में भी गिरावट आई है। 
 
कच्चे तेल के यौगिक फिनॉल के सबसे बड़े आयातकों में शुमार मुंबई स्थित सोनकमल इंटरप्राइज के निदेशक जनक लठानी ने कहा कि प्लाईवुड उद्योग में फिनॉल का इस्तेमाल श्रेणी के अनुसार लकड़ी की पतली परतों को जोडऩे में किया जाता है। फिनॉल का इस्तेमाल लैमिनेशन के लिए भी किया जाता है। कच्चे तेल के दामों में तेजी के बाद दो महीने में फिनॉल के दाम भी 18-20 प्रतिशत बढ़ चुके हैं तथा प्लाईवुड पर 28 फीसदी जीएसटी ने प्लाईवुड और लैमिनेट उद्योग को नुकसान पहुंचाया है। इसने पूरे उद्योग के रुख को शृंखलाबद्ध रूप से प्रभावित करते हुए फिनॉल की मांग को भी कम कर दिया है।
 
भारत में पिछले दो महीनों में फिनॉल के दाम 68 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो तक हो चुके हैं, जबकि अंतरराष्टï्रीय दाम अब 900 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 1,150 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। फिनॉल का उपयोग प्लाईवुड और लैमिनेट उद्योग में किया जाता है। फिनॉल के अलावा जिन अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, उनमें शामिल हैं - मेथेनॉल, फोर्मेल्डीहाइड और मेलामाइन। लैमिनेट में उत्पादन लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा रसायनों का रहता है। हालांकि दो महीने में ही फिनॉल के दाम 20 प्रतिशत और अन्य रसायनों के दाम करीब 30 प्रतिशत बढ़ गए हैं। भारतीय प्लाईवुड उद्योग का आकार करीब 26,000 करोड़ रुपये का है। हरियाणा के यमुना नगर में प्रमुख रूप से इसके उद्यम हैं जहां से भारत के कुल प्लाईवुड की 60-65 प्रतिशत आपूर्ति होती है। लैमिनेट उद्योग का अनुमानित आकार 7,000 करोड़ रुपये का है। फर्नीचर में इस्तेमाल के लिए प्लाईवुड में लैमिनेशन की जरूर पड़ती है।
 
यमुना नगर (हरियाणा) स्थित श्रीराम वुड के हिस्सेदार राजेश त्रेहन के अनुसार, 28 प्रतिशत जीएसटी की वजह से सभी श्रेणियों के प्लाईवुड की मांग जीएसटी के बाद 10-15 फीसदी तक गिर गई है। यहां 400-450 इकाइयां हैं और इनमें से कई क्षमता से कम पर कार्य कर रही हैं जिससे व्यापार और रोजगार प्रभावित हो रहा है। वे जीएसटी में बड़ी कटौती का सुझाव देते हैं और कहते हैं कि यूएई चीन से प्लाईवुड खरीदता है, जबकि भारत की लागत काफी प्रतिस्पर्धी है और इस वजह से सरकार को प्लाईवुड के निर्यात को प्रोत्साहित करना चाहिए जिससे रोजगार और किसानों की आय में वृद्धि करने में मदद मिलेगी।
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