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बिना टाटा ब्रांड पैकेट टी के कारोबार में समूह की कंपनी

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Nov 10, 2017 10:05 PM IST

कारोबारी नुकसान से निपटने के लिए अमलगमेटेड प्लांटेशंस प्राइवेट लिमिटेड (एपीपीएल) ने पैकेट बंद चाय कारोबार में उतरने का फैसला किया है। टाटा ग्लोबल बेवरिजेज (टीजीबीएल) की सहायक इकाई एपीपीएल इस दिशा में अपनी मातृ कंपनी के बिना आगे बढ़ेगी।  टीजीबीएल (उस समय टाटा टी) ने खुदरा ब्रांडों पर ध्यान देने के लिए असम और पश्चिम बंगाल में अपना प्लांटेशन कारोबार विभाजित कर दिया था, जिसके बाद 2007 में एपीपीएल अस्तित्व में आई थी। शुरू में टाटा टी ने प्लांटेशन कारोबार से निकलने का मन बना लिया था लेकिन बाद में दो सहायक कंपनियां बनाकर इसने चाय बगानों पर नियंत्रण बरकरार रखा। एपीपीएल इनमें एक कंपनी थी। इस समय एपीपीएल में टीजीबीएल की 41 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि समूह की ही एक दूसरी इकाई टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दोनों मिलाकर टाटा समूह की कुल हिस्सेदारी 66 प्रतिशत तक हो जाती है।

 
अपने नए उद्यम के साथ एपीपीएल देश के पूर्वोत्तर भाग में चाय कारोबार में संभावनाओं का लाभ उठाने वाली पहली कंपनी होगी। इस भाग में चाय कारोबार पर किसी एक बड़े ब्रांड का नियंत्रण नहीं हैं। कंपनी उन क्षेत्रों और खंडों से दूर रहेगी, जिनमें टीजीबीएल का वर्चस्व है।  एपीपीएल में प्रबंध निदेशक जगजीत कांडल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हम पहले पूर्वोत्तर क्षेत्र के बाजार पर ध्यान देंगे और प्रत्येक राज्य के लिए एक वितरक नियुक्त करेंगे। इसके बाद हम देश के दूसरे हिस्से में कारोबार शुरू करेंगे। हालांकि हम उन क्षेत्रों में कारोबार शुरू नहीं करेंगे, जहां टीजीबीएल मजबूत स्थिति में है।'सबसे पहले एपीपीएल हाल में शुरू हुए अपने ब्रांड हैटिगर गोल्ड (270 रुपये प्रति किलोग्राम) असम, त्रिपुरा और अन्य राज्यों में उतारेगी। इसके बाद अगले साल जनवरी में 400-450 रुपये प्रति किलोग्राम मूल्य के दायरे में एक और ब्रांड उतारेगी। मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक एपीपीएल पूर्वोत्तर क्षेत्र में 4-5 वितरक तैयार करना चाहती है। हालांकि कंपनी करीब 85 करोड़ रुपये के संचयी नुकसान तले दबी है, इसलिए विपणन गतिविधियों पर खर्च करने के लिए इसके पास काफी कम रकम है। 
 
कांडल ने कहा, 'यह जोर बिक्री पर होगा और जरूरी नहीं है कि यह एक आक्रामक विपणन अभियान हो। फिलहाल रकम उपलब्ध नहीं है।' पूर्वोत्तर भारत संगठित चाय बाजार नहीं है और कुछेक स्थानीय ब्रांड को छोड़कर राष्टï्रीय स्तर की बड़ी कंपनियां राज्य की राजधानियों को छोड़कर ज्यादातर स्थानों से नदारद हैं। यही वह खंड है, जिस पर एपीपीए की नजर है।
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