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सीधे खरीद की पेशकश से वैश्विक खरीदारों को लुभा रहे सराफ

दिलीप कुमार झा | मुंबई Nov 13, 2017 09:52 PM IST

चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों के दौरान देश से रत्न एवं आभूषणों के निर्यात में भारी गिरावट आई है। इसके चलते वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाली इस क्षेत्र की शीर्ष संस्था रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने विश्व के 110 सबसे बड़े खरीदारों को भारत आने के लिए आमंत्रित किया है ताकि तराशे हीरों के भारतीय विक्रेताओं के साथ उनके सीधे कारोबार को बढ़ाया जा सके।  
 
अमेरिका, रूस, तुर्की और चीन से तराशे हीरों के आयातक सीधे भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ सौदा करते हैं। जो आयातक पहली बार भारत आ रहे हैं, उन्होंने भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से खरीद जारी रखने में रुचि दिखाई है। यह तराशे हीरों के खरीदारों और विक्रेताओं के बीच ऐसी पहली बैठक है, जिसमें विदेशी आयातक भारतीय विक्रेताओं के साथ आपूर्ति की शर्तों और कीमतों के बारे में बात करेंगे। पहले ये खरीदार स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से तराशे हुए हीरे खरीद रहे थे। 
 
जीजेईपीसी के चेयरमैन प्रवीणशंकर पंड्या ने कहा, 'खरीदारों और विक्रेताओं की बैठक के लिए नवंबर सबसे अच्छा महीना है क्योंकि इसके साथ ही अहम बाजारों में 2018 के लिए नया सीजन शुरू हो जाता है। इस त्योहारी सीजन में दुनियाभर में क्रिसमस, चीन का नया वर्ष और अन्य त्योहार आते हैं।' भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात घट रहा है, इसलिए यह बैठक गिरावट को रोकने के लिए है। जीजेईपीसी के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस साल अप्रैल से सितंबर तक की अवधि में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 7.43 फीसदी घटकर 16.83 अरब डॉलर का रहा। पिछले साल की इसी अवधि में 18.18 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। हालांकि रुपये के लिहाज से अप्रैल-सितंबर अवधि में रत्नाभूषण निर्यात 10 फीसदी गिरकर 1,08,378.38 करोड़ रुपये रहा। 
 
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुआई करते हुए डायमंड डीलर्स क्लब (अमेरिका) के अध्यक्ष रोवेन कुफमैन ने कहा, 'भारत से सीधी खरीद से निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलती है क्योंकि इससे हमें विभिन्न प्रकार के तराशे हीरे मिलते हैं, जो सभी तरह के गहनों के लिए उपयुक्त हैं।' हालांकि भारत से अमेरिका को रत्न एवं आभूषणों की बिक्री सुधरी है, लेकिन पहली छमाही में गिरावट की दूसरी छमाही में भरपाई करना संभव नहीं होगा। इसका मतलब है कि वित्त वर्ष  2018 के दौरान देश का रत्न एवं आभूषण निर्यात कम रहने के आसार हैं। 
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