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थोक महंगाई 6 माह में सबसे अधिक

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Nov 14, 2017 09:56 PM IST

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई अक्टूबर में छह महीने के सर्वोच्च स्तर 3.59 फीसदी पर रही। पिछले महीने में थोक महंगाई की दर 2.6 फीसदी थी। इस महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई में भी लगभग इतनी ही बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अक्टूबर में सात महीने के सर्वोच्च स्तर 3.58 फीसदी पर रही है। इस वजह से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगले महीने की नीतिगत समीक्षा में दरों में कटौती नहीं करने का फैसला ले सकता है। हालांकि देश की आर्थिक वृद्धि में तेजी के लिए दरों में कटौती अहम है। 
 
खाद्य महंगाई से थोक मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी हुई है, जबकि विनिर्मित उत्पादों की कीमत वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई है। दरअसल प्याज, टमाटर और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से खाद्य महंगाई में इजाफा हुआ है। इससे कोर महंगाई (खाद्य उत्पादों के अलावा विनिर्मित उत्पाद) 2.8 फीसदी के स्तर पर स्थिर रही है। चालू वित्त वर्ष में अब तक केवल अप्रैल में महंगाई अक्टूबर से अधिक रही थी। अप्रैल में महंगाई दर 3.85 फीसदी रही थी। अक्टूबर में खाद्य महंगाई 100 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 4.3 फीसदी पर पहुंच गई। सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी अक्टूबर में 36.61 फीसदी रही, जो सितंबर में 15.48 फीसदी थी। 
 
प्याज की कीमतों में अक्टूबर के दौरान 127.04 फीसदी रही, जबकि टमाटर के दामों में 97 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई।  हालांकि दालों की कीमतों में अक्टूबर में भी 31.05 फीसदी गिरावट रही। इससे पिछले महीनों में भी दालों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी। इसी तरह आलू की कीमतों में 44.29 फीसदी और गेहूं की कीमतों में 1.99 फीसदी गिरावट रही।  ईंधन और बिजली खंड में महंगाई अक्टूबर में बढ़कर 10.52 फीसदी पर पहुंच गई, जो सितंबर में 9.01 फीसदी थी। तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी या रसोई गैस) के दाम अक्टूबर में 26.52 फीसदी बढ़े, जबकि पिछले महीने इसकी कीमतों में 20.75 फीसदी थी। कम उत्पादन के कारण बिजली की दरों में भी बढ़ोतरी हुई। 
 
विनिर्मित उत्पादों की महंगाई घटकर 2.62 फीसदी पर आ गई, जो सितंबर में 2.72 फीसदी थी। रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'डब्ल्यूपीआई महंगाई में अनुमान से अधिक बढ़ोतरी आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में यथास्थिति के हमारे अनुमान को मजबूत करता है।' केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने भी कहा कि आरबीआई के दिसंबर में अपनी मौद्रिक नीति में दरें नहीं घटाने के आसार हैं। नायर का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और घरेलू स्तर पर सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी से थोक महंगाई नवंबर में भी अधिक रहेगी। सबनवीस ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि डब्ल्यूपीआई महंगाई चालू वित्त वर्ष के अंत तक 3.5 फीसदी से 4 फीसदी के बीच रहेगी।' नायर ने कहा, 'सीपीआई और डब्ल्यूपीआई महंगाई अक्टूबर में लगभग एकसमान स्तर पर रही हैं, लेकिन ऐसी स्थिति कुछ समय ही रहेगी। इसकी वजह यह है कि वित्त वर्ष 2018 के शेष महीनों में खुदरा महंगाई ज्यादा रहने के आसार हैं।'
 
महंगाई में बढ़ोतरी मौसमी : गर्ग 
 
आर्थिक मामलों के सचिव एस सी गर्ग ने मंगलवार को कहा कि मौसमी कारकों की वजह से थोक और खुदरा महंगाई के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई में बढ़ोतरी 4 फीसदी की सीमा से नीचे रहेगी।
कीवर्ड wpi, थोक मूल्य सूचकांक डब्ल्यूपीआई,

  
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