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फसल की प्रचुरता ने बढ़ाई आलू के किसानों की चिंता

राजीव भास्कर | जालंधर Nov 19, 2017 09:20 PM IST

कोल्ड स्टोरों में अब भी पुरानी फसल भरी होने से राज्य में आलू के किसानों को इस सीजन में भी मुनाफा कम होने के आसार नजर आ रहे हैं। बागवानी के उप निदेशक सतबीर सिंह ने कहा कि फिलहाल लगभग 40 प्रतिशत कोल्ड स्टोर पुरानी फसलों से भरे हुए हैं। ऐसे में किसानों को बाजार में फसल की भरमार होने का सामना करना पड़ सकता है। पिछले साल भी इस प्रकार के हालात से जूझने की वजह से किसानों ने अपनी फसल को सड़कों पर फेंककर विरोध जताया था। उस समय कीमतें गिरकर एक रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थीं। यहां तक ​​कि भंडारण की लागत ही तीन रुपये प्रति किलोग्राम थी।

 
पिछले कुछ सालों से राज्य में आलू उत्पादन में अधिकता देखी गई है, लेकिन इस उपज को समय पर दूसरे राज्यों में नहीं पहुंचाया गया। नतीजतन, आलू उत्पादकों को अपनी फसल औने-पौने भाव पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। जालंधर पटैटो ग्रोवर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता जगत प्रकाश सिंह गिल ने कहा कि नई फसल के लिए कोई जगह नहीं होगी और किसानों को इसे सड़कों पर फेंकने का दबाव बनेगा, क्योंकि बाजार की मौजूदा दरें बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में, जहां मांग बहुुत अधिक है, आलू भेजने की परिवहन सुविधा प्रदान करने में राज्य सरकार की मदद के अभाव में पंजाब के किसानों को मुश्किल वक्त का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मदद नहीं कर रही है, जबकि अन्य राज्य सरकारें अपने किसानों की मदद कर रही हैं।
 
सतबीर सिंह का कहना है कि इस वर्ष आलू का उत्पादन 10-15 प्रतिशत तक घटने की संभावना है, क्योंकि पिछले सीजन में किसानों को उनके उत्पाद के लिए पर्याप्त दाम नहीं मिले। अधिक उत्पादन के कारण पिछले सीजन में कीमतों में गिरावट आई, जिसकी वजह से कोल्ड स्टोर भी भर गए। भारत के सालाना आलू उत्पादन में पंजाब का योगदान पांच प्रतिशत रहता है और जालंधर, कपूरथला, एसबीएस नगर तथा होशियारपुर जिले प्रमुख उत्पादन केंद्र हैं। सतबीर सिंह ने कहा कि हालांकि पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में भारत का अधिकांश आलू उत्पादन होता है, लेकिन वे बीज पंजाब से खरीदते हैं। 2016 में इन राज्यों के किसानों ने नोटबंदी की वजह से बीजों की खरीद नहीं की। इससे भी पंजाब में किसानों का बिक्री चक्र बिगड़ गया।
 
पिछले साल की समस्या दोबारा होने से रोकने के लिए किए गए उपायों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मार्कफेड को किसानों से आलू की खरीद करने और उन्हें स्कूलों में मिड-डे मील के लिए इस्तेमाल करने के लिए कहा है। इस साल भी स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा उचित कदम उठाए जाएंगे।
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