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25 फीसदी उबल गया अंडा

दिलीप कुमार झा | मुंबई Nov 20, 2017 09:56 PM IST

एक महीने में 25 फीसदी बढ़े दाम

अंडे के दाम पिछले एक महीने के दौरान 25 फीसदी बढ़ गए हैं। हालांकि अक्टूबर शुरू होने से लेकर अब तक ब्रॉइलर चिकन की कीमतें 30 फीसदी घट चुकी हैं। ऑनलाइन एजेंसी पोल्ट्री बाजार के आंकड़े दर्शाते हैं कि हैदराबाद के बेंचमार्क थोक बाजार में अंडे के औसत दाम 4.54 रुपये प्रति अंडा हैं, जो अक्टूबर में 3.79 रुपये थे। पुणे में अंडा 4.15 रुपये से बढ़कर 4.98 रुपये का हो गया है। इसके खुदरा बाजार में दाम बढ़कर करीब 6 रुपये हो गए हैं, जो अब तक सर्वोच्च स्तर है। इसके विपरीत पंजाब के थोक बाजारों में शुक्रवार को ब्रॉइलर चिकन औसतन 101 रुपये प्रति किलोग्राम बिका, जो पिछले महीने 132 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था। इसकी कीमतें पुणे और नासिक के बाजारों में करीब 62 रुपये प्रति किलोग्राम बोली जा रही हैं, जो पिछले महीने 70 रुपये प्रति किलोग्राम थीं। 

गोदरेज एग्रोवेट के प्रबंध निदेशक बलराम यादव ने कहा, 'कम उत्पादन के कारण अंडे की आपूर्ति कम है। आपूर्ति में कमी कुछ और महीने बने रहने के आसार हैं, इसलिए फरवरी या मार्च तक कीमतें मजबूत बनी रहेंगी। चिकन के मामले में मुर्गीपालकों के पास बड़ा स्टॉक है। यह स्टॉक दो-तीन सप्ताह में खत्म होने के आसार हैं, इसलिए चिकन के दाम दिसंबर से बढऩे शुरू हो जाएंगे।'

पिछले तीन-चार साल से कमजोर कीमतों के कारण स्वतंत्र मुर्गीपालकों को नुकसान हो रहा है। हालांकि बड़े कंपनी समूहों ने इस उद्योग में प्रवेश कर अपने पैसे के बल पर उद्योग के समीकरण बदल दिए हैं। इस वजह से बहुत से छोटे और मझोले मुर्गीपालकों ने अपने फार्म बंद कर दिए या वे कम मुर्गियां पालने लगे हैं।इसके नतीजतन अंडे का उत्पादन कम बना हुआ है। हालांकि सर्दियों में मांग अमूमन बढ़ती है। यादव ने कहा कि अंडे के दाम खुदरा बाजारों में 0.5 से 1 रुपये प्रति अंडा और थोक बाजारों में 0.25 से 0.5 रुपये प्रति अंडा और बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, 'इस स्तर से अधिक दाम बढऩे से उपभोक्ता अपनी खरीद घटा देंगे।'

वेंकटेश्वर हैचरीज के महाप्रबंधक के जी आनंद ने कहा, 'अंडे की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की एक वजह यह भी है कि इन्हें चिकन की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक भंडारित कर रखा जा सकता है। पिछले 3-4 साल के दौरान बहुत से स्वतंत्र मुर्गीपालकों ने अपना उत्पादन घटा दिया है, जिससे अंडे की आपर्ति में कमी आई है। चिकन के दाम अगले कुछ सप्ताह में बढऩे का अनुमान है, इसलिए मुर्गीपालकों को बेहतर मार्जिन मिलने की उम्मीद है।' दक्षिण भारत में बहुत से उपभोक्ता कार्तिक महीने में चिकन खाने से बचते हैं। कार्तिक महीना अक्टूबर के तीसरे सप्ताह के आसपास शुरू होता है। हालांकि वे नवंबर के अंत में फिर से चिकन खाने लगते हैं। 
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