होम » Commodities
«वापस

खाद्य तेल रिफाइनरियों की मौज, ग्राहकों पर पड़ेगा बोझ

राजेश भयानी | मुंबई Nov 20, 2017 10:01 PM IST

बढ़ी खरीदारी

► इसे अंदरखाने की जानकारी कहें या सटीक अंदाज मगर बड़े कारोबारियों को खाद्य तेल पर आयात शुल्क बढ़ने की पहले से थी भनक
सरकार ने शुक्रवार रात अधिसूचना जारी कर खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी की
बड़े कारोबारियों ने एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर खाद्य तेल के प्रमुख अनुबंधों में लिवाली की
जिंस एक्सचेंजों में सोमवार को सभी तेलों ने 4 फीसदी अपर सर्किट छुआ

भले ही इसकी वजह अंदर की जानकारी हो उनका सही अंदाजा, मगर कुछ बड़े कारोबारियों ने केंद्र सरकार के शुक्रवार को खाद्य तेल पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी की घोषणा से पहले देश के अग्रणी जिंस एक्सचेंजों एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर खाद्य तेल अनुबंधों में बड़ी लिवाली की।  जिंस एक्सचेंजों में सोमवार को खाद्य तेलों की कीमतें 4 फीसदी की ऊपरी सीमा (अपर सर्किट) को छू गईं, जिससे वहां इनका कारोबार थम गया। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा अगस्त में की गई थी, लेकिन उससे भी घरेलू बाजार में तिलहनों की कीमतों में गिरावट नहीं थमी। इसकी वजह यह थी कि उसके बाद खाद्य तेल का आयात बढऩे लगा था। सरकार ने शुक्रवार रात एक अधिसूचना जारी कर सभी तरह के खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी। सरकार ने कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क 15 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी और रिफाइंड पर 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 कर दिया है। 

अब खाद्य तेल रिफाइनरियां जल्द ही कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती हैं। जैसा कि पहले ही जिक्र किया जा चुका है कि कुछ कारोबारियों ने सरकार के फैसले को पहले ही भांप लिया था। शुक्रवार शाम को एनसीडीईएक्स के सबसे बड़े कारोबारियों के पास लॉन्ग से तीन गुनी शॉर्ट पोजिशन थीं, इसलिए पूरा बाजार ही शॉर्ट था। सोयाबीन के दाम सोमवार को 2 से 2.5 फीसदी बढ़ गए, जिससे शॉर्ट सेलर फंस गए। हालांकि सोया तेल में सबसे बड़े खरीदार के पास 31,940 लॉट की खरीद पोजिशन थी, जबकि सबसे बड़े बिकवाल के पास 6,310 लॉट की पोजिशन थी। इसका मतलब है कि खरीदार कारोबारियों को आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का पता था। बिना बड़े तेजडि़ए कारोबारियों के पूरा सोया तेल बाजार शॉर्ट था। 

इसी तरह एमसीएक्स पर शीर्ष 10 खरीद पॉजिशन कुल 6,219 लॉट की थीं, जबकि शीर्ष 10 बिकवाल जिशन कुल 6,099 लॉट की थीं। बाजार के जानकारों का कहना है कि एक बड़े कारोबारी ने शुल्क बढऩे से पहले खरीद पोजिशन बढ़ाईं और अब कीमतों में बढ़ोतरी और इनके ऊंचे बने रहने से वह तगड़ा मुनाफा काट रहा है।  एक्सचेंजों पर सोमवार को कच्चे पाम तेल (सीपीओ) और सोया तेल की कीमतें 4 फीसदी के ऊपरी सीमा को छू गईं। वहीं मलेशियन जिंस एक्सचेंज पर सीपीओ वायदा शुक्रवार को करीब 3 फीसदी लुढ़का। यह इस चिंता में गिरा कि भारत के आयात शुल्क बढ़ाने से भारतीय आयात घटेगा। इंदौर की थोक मंडियों में बेंचमार्क सोयाबीन के दाम सोमवार को 2,700 रुपये से बढ़कर 2,800 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। हालांकि ये अब भी सरकार के 3,050 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम हैं। सोया डिगम और रिफाइंड तेल के दाम भी करीब 5 फीसदी बढ़ गए। 

सरकार ने आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का फैसला इसलिए लिया क्योंकि खाद्य तेल लगातार बढ़ रहा था। देश में तिलहन का भारी उत्पादन हुआ है और किसानों को इनकी अच्छी कीमतें नहीं मिल रही हैं।   सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के मुताबिक तेल वर्ष नवंबर 2016 से अक्टूबर 2017 में 5 फीसदी बढ़कर 154 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर रहा है। पिछले पांच साल के दौरान आयात में 45 फीसदी से अधिक इजाफा हुआ है। इस समय देश की 75 मांग आयातित तेल से पूरी होती है।
कीवर्ड खाद्य तेल, आयात शुल्क, अधिसूचना, एनसीडीईएक्स, एमसीएक्स, अनुबंध, जिंस, रिफाइंड,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक