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बीएसई में चढ़े चाय कंपनियों के शेयर

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Nov 21, 2017 10:01 PM IST

चाय उत्पादक कंपनियों में लंबे समय तक अनिश्चितता के बाद इस उद्योग में अचानक उम्मीद की किरण पैदा हुई है। निकट भविष्य में बैलेंस शीट मजबूत होने की उम्मीद से बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर चाय उत्पादक कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई है। मैकलॉयड रसेल का शेयर बीएसई पर 11.49 फीसदी तक चढ़कर 192.15 रुपये पर पहुंच गया जबकि रसेल इंडिया 7.33 फीसदी चढ़कर 119.15 रुपये पर पहुंच गया। गुडरिक गु्रप का शेयर 5.23 फीसदी चढ़कर 405.15 रुपये हो गया और जेम्स वॉरेन टी 4.70 फीसदी की बढ़त के साथ 137.1 पर बंद हुआ। 

 
उद्योग के अधिकारियों के अनुसार यह उम्मीद चाय कीमतों में सुधार की वजह से दिखी है, क्योंकि उत्पादन में कमी आने की आशंका है। इस साल सितंबर में भारी बारिश की वजह से असम में चाय उत्पादन 27 प्रतिशत तक घटकर 8.175 करोड़ किलोग्राम रह गया। असम का देश के सालाना चाय उत्पादन में 50 फीसदी से अधिक का योगदान रहा है। पश्चिम बंगाल के डूआर्स क्षेत्र में भी चाय उत्पादन समान महीने में लगभग 19 फीसदी गिरकर 4.301 करोड़ किलोग्राम रह गया। नवंबर में भी पिछले साल के समान महीने के 10.9 करोड़ किलोग्राम उत्पादन की तुलना में 10-15 फीसदी की कमी दर्ज किए जाने की आशंका है और जल्दी ठंड तेज होने से चाय बागान बंद रहने की दो महीने की अवधि में एक पखवाड़े तक का इजाफा हो सकता है। 
 
रसेल इंडिया के प्रबंध निदेशक सी एस बेदी ने कहा, 'मेरा मानना है कि इस साल कुल उत्पादन पूर्ववर्ती वर्ष की तुलना में कम रहेगा और इसकी वजह से शुरुआती सीजन अच्छा रहेगा।'
आमतौर पर नीलामी के साथ साथ निजी बिक्री में कीमतों में तेजी तब आती है जब  उद्योग को उत्पादन में गिरावट का सामना करना पड़े और इसी तरह की उम्मीद मौजूदा समय में भी बनी हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी चाय उत्पादक मैकलॉयड रसेल के अनुसार भारत में कीमतें घरेलू और निर्यात बाजार दोनों से बढ़ती मांग और कम उत्पादन की वजह से 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ी हैं।
 
मैकलॉयड रसेल के निदेशक कमल किशोर का मानना है कि कीमतें आने वाले तीन वर्षों में मजबूत बनी रहेंगी। उन्होंने कहा, 'जब कीमतें चढऩी शुरू होती हैं तो इनमें स्थिरता आने तक तेजी बरकरार रहती है। कीमतों में सुधार आ रहा है और मेरा मानना है कि इस साल चाय कीमतों में कुल मिलाकर 10 फीसदी की वृद्घि दर्ज की जाएगी।' ऊंची कीमतों का मतलब है चाय कंपनियों के लिए बेहतर राजस्व। 30 सितंबर को समाप्त तिमाही के लिए रसेल इंडिया और गुडरिक गु्रप दोनों का राजस्व 10 फीसदी बढ़कर 51.66 करोड़ रुपये और 200.55 करोड़ रुपये रहा। हालांकि मैकलॉयड रसेल की शुद्घ आय 0.7 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 468.63 करोड़ रुपये पर रही।
 
भारतीय चाय संघ (आईटीए) के चेयरमैन आजम मोनेम का मानना है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार, दोनों में मांग बढ़ी है। चाय के लिए घरेलू मांग पिछले वित्त वर्ष के 100 करोड़ किलोग्राम को पार कर जाने का अनुमान है। इसके अलावा उम्मीद इस क्षेत्र में पैकेट वाली चाय पर कंपनियों द्वारा जोर दिए जाने से भी पैदा हुई है। इससे न सिर्फ प्राकृतिक समस्याओं से पैदा होने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी बल्कि मुनाफा मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी क्योंकि यह चाय प्रति किलोग्राम 10-15 रुपये का अतिरिक्त मार्जिन सुनिश्चित करती है। मैकलॉयड रसेल का मानना है कि एवरेडी इंडस्ट्रीज के साथ उसका पैकेट वाली चाय के लिए संयुक्त उपक्रम निकट भविष्य में 300 करोड़ रुपये दिला सकता है। वहीं कैमेलिया पीएलसी के स्वामित्व वाली गुडरिक भी पैकेट चाय से राजस्व भागीदारी मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी करना चाहती है। 
कीवर्ड tea, bagan, BSE,

  
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