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निर्यात से प्याज के दाम पर लगाम!

सुशील मिश्र | मुंबई Nov 23, 2017 10:08 PM IST

दाम पर अंकुश की कोशिश

सरकार ने प्याज निर्यात के लिए 850 डॉलर प्रति टन न्यूनतम मूल्य तय किया है
पिछले तीन महीने में प्याज 83 फीसदी, छह महीने में 612 फीसदी महंगा हुआ
31 दिसंबर 2017 तक प्याज निर्यात पर एमईपी की शर्त लागू रहेगी
सरकारी कंपनियों के जरिये प्याज का आयात किया जाएगा
नेफेड और एसएफएसी घरेलू बाजार से 12 हजार टन प्याज खरीदेंगी

प्याज के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। थोक बाजार में प्याज के दाम दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए तो खुदरा बाजार में प्याज 65 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है। प्याज की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इसका न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) तय कर दिया। सरकारी अधिसूचना के मुताबिक 31 दिसंबर 2017 तक प्याज निर्यात पर एमईपी की शर्त लागू रहेगी। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने प्याज निर्यात के लिए 850 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम मूल्य तय किया।

सरकार की कई कोशिशों के बावजूद प्याज के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्याज की सबसे बड़ी थोक मंडी लासलगांव में प्याज के दाम 3,200 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गए, जो 21 अक्टूबर 2015 के बाद सबसे ज्यादा हैं। चालू महीने की शुरुआत में लासलगांव में प्याज का औसत भाव 2,525 रुपये प्रति क्विंटल था। प्याज महंगाई की रफ्तार चौंकाने वाली है। पिछले एक महीने में प्याज के दाम 10.34 फीसदी बढ़े हैं जबकि पिछले तीन महीने में प्याज 83 फीसदी, छह महीने में 612 फीसदी और साल भर में करीब 400 फीसदी महंगा हुआ है। छह महीने पहले यानी 23 मई को लासलगांव में प्याज की औसत कीमत 450 रुपये प्रति क्विंटल थी जो आज 3,200 रुपये को पार कर गई। थोक बाजार में कीमतें बढऩे से खुदरा बाजार में प्याज के दाम मनमाने तरीके से बढऩे शुरू हो गए। खुदरा बाजार में प्याज 45 रुपये से 70 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार लगातार कोशिश भी कर रही है। प्याज के दाम बढऩे की एक वजह निर्यात को भी माना जा रहा है इसलिए गुरुवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय ने प्याज निर्यात के लिए 850 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम मूल्य तय किया, जो रुपये में बदला जाए तो 55,000 रुपये प्रति टन होगा। यानी 5,500 रुपये क्विंटल प्याज का निर्यात मूल्य तय किया गया। इस तरह देखा जाए तो अब प्याज 50 रुपये किलो से कम में निर्यात नहीं किया जा सकता है।

प्याज में छाई महंगाई के छिलके उतारने के लिए सरकार ने एमईपी तय करने के साथ प्याज का आयात करने का भी फैसला किया है। सरकारी कंपनियों के जरिये प्याज का आयात किया जाएगा। एमएमटीसी दो हजार टन प्याज का आयात करेगी। आयात करने के साथ घरेलू बाजार में भी प्याज की खरीद की जाएगी। नेफेड और एसएफएसी घरेलू बाजार से 12 हजार टन प्याज खरीदेंगी।

एक तरफ देश में प्याज की कमी है तो दूसरी तरफ निर्यात बढ़ रहा है। देश में इस साल प्याज निर्यात 30 फीसदी अधिक किया गया। चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले पांच महीने अर्थात अप्रैल से अगस्त के दौरान देश से 13.86 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ है जबकि पिछले साल इस दौरान 10.63 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था। निर्यात पर शिकंजा कसने के लिए ही सरकार ने न्यूनतम निर्यात मूल्य तय किया है। प्याज महंगा होने की वजह आवक कम होना बताया जा रहा है। कारोबारियों की मानी जाए तो इस साल बारिश के कारण प्याज की फसल खराब हुई जिसके कारण बाजार में आपूर्ति कम हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं। लेकिन सरकार को लग रहा है कि इन दावों में कुछ गड़बड़ है इसलिए पहले प्याज की स्टॉक लिमिट तय की गई और अब एमईपी तय की गई है।
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