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मुनाफावसूली से जीरा हल्दी महंगी

सुशील मिश्र | मुंबई Nov 23, 2017 10:08 PM IST

कारोबारियों को हल्दी की घरेलू मांग में और तेजी की उम्मीद

पिछले 10 दिनों से जीरा और हल्दी के भाव तेजी से बढ़े हैं। महज 10 दिन में जीरे के दाम साढ़े बारह फीसदी चढ़े तो हल्दी का रंग भी 10 फीसदी चटख हो गया। आयात मांग बढ़ने की वजह से जीरा महंगा हुआ है जबकि मुनाफवसूली के चलते हल्दी का रंग चटख हुआ है। बेहतर विदेश मांग के चलते जीरे का छौंक अभी और महंगा हो सकता है जबकि घरेलू बाजार में हल्दी की अच्छी मांग कीमतों को मजबूत करेगी।

लगातार निर्यात और घरेलू मांग बढ़ने के कारण जीरा महंगा हो रहा है। पिछले सप्ताह से जीरे के भाव तूफानी गति से भाग रहे हैं। वायदा बाजार में जीरा सौदों में अपर सर्किट लग रहा है। जीरे के दाम पिछले 10 दिनों में 2,345 रुपये प्रति क्विंटल चढ़े हैं। पिछले सप्ताह की शुरुआत में यानी 13 नवंबर को जीरा 18,800 रुपये प्रति क्विंटल था जो आज बढ़कर 21,145 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। हाजिर बाजार में जीरे का भाव 19,980 रुपये क्विंटल पहुंच गया।

कारोबारियों की मानी जाए तो मांग की अपेक्षा आपूर्ति कम होने से जीरे में तेजी देखी जा रही है। बाजार में बेहतर दाम मिलने के कारण कारोबारी मुनाफा वसूली भी कर रहे हैं क्योंकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में जीरे का आयात पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा हुआ है। साथ ही जीरा उत्पादक राज्य गुजरात में बुवाई पिछले साल की अपेक्षा बेहतर है, जिसके चलते कारोबारी और किसान मुनाफावसूली कर रहे हैं। 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में जीरे का निर्यात 13,879 टन हुआ जो पिछले साल की अपेक्षा 46 फीसदी अधिक है। वहीं अगस्त महीने में देश में 1,044 टन जीरा आयात किया गया जो पिछले साल के अगस्त महीने से करीब 209 फीसदी अधिक है। जीरा आयात का यह आंकड़ा पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा है। सरकार द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों (अप्रैल-सिंतबर) में देश में 63,085 टन जीरे का आयात किया गया जो पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में आयात किये गए जीरे के मुकाबले 2.6 फीसदी कम है। जीरा बुआई के आ रहे आंकड़े बेहतर हैं। गुजरात सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक 20 नवंबर तक राज्य में 1.32 लाख हेक्टेयर में जीरे की बुआई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक महज एक लाख हेक्टेयर में जीरे की बुआई हुई थी। 

जीरे के साथ हल्दी का भी रंग चटक हो रहा है। दरअसल बारिश के कारण जीरा और हल्दी दोनों की फसलें प्रभावित हुई थी। जिसके कारण बाजार में बेहतर मांग बनी हुई है। वायदा बाजार में हल्दी के दाम पिछले एक सप्ताह में 600 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा बढ़ गए। वायदा बाजार में 15 नवंबर को हल्दी 6,800 रुपये प्रति क्विंटल  के आस पास बोली जा रही थी।

एनसीडीईएक्स पर हल्दी दिसंबर वायदा अनुबंध 15 नवंबर को 6,806 रुपये प्रति क्विंटल पर खुला था जो महज आठ दिनों में बढ़कर 7,424 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। हाजिर बाजार में हल्दी का भाव करीब 7,500 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच चुका है। हल्दी की बाजार में आपूर्ति भी बेहतर है। नवंबर के शुरुआती 15 दिनों में 4,577 टन हल्दी की आपूर्ति हुई जबकि अक्टूबर महीने के अंतिम 15 दिनों में 3,457 टन हल्दी बाजार में पहुंची थी। बाजार जानकारों की मानी जाए तो हल्दी की विदेशी मांग भी पिछले साल से कम है लेकिन कारोबारियों को उम्मीद है कि घरेलू मांग तेजी से बढ़ेगी जिस कारण खरीदारी की जा रही है।

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